5400 ग्रेड पे पा रहे सभी प्रवक्ताओं और हेडमास्टर के बजाए केवल इंटर कालेज के प्रभारी प्रधानाचार्य को सरकार से राजपत्रित अधिकारी का दर्जा मिल सकता है। वित्त विभाग फिलहाल सभी प्रवक्ताओं को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा देने के प्रस्ताव पर सहमत नहीं है। रविवार को वित्त विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की। इस मामले में आचार संहिता के बाद सरकार निर्णय ले सकती है।
सूत्रों के अनुसार तर्क यह है कि राजपत्रित का दर्जा दिए जाने से प्रवक्ता कैडर में आमूलचूल परिवर्तन करना होगा। साथ ही राजपत्रित पद होने पर प्रवक्ता पद पर भर्तियों में राज्य के स्थानीय युवाओं का एकाधिकार नहीं रह जाएगा। राजपत्रित सेवाओं की तरह पूरे देश से अभ्यर्थी प्रवक्ता पद के लिए भर्ती में शामिल होने का रास्ता खुल जाएगा।
दूसरी तरफ,शिक्षा विभाग भी अब प्रभारी प्रधानाचार्य पद को ज्यादा अधिकार संपन्न बनाने के पक्ष में है। इसके पीछे प्रधानाचार्य की सीधी भर्ती के विरेाध को भी वजह माना जा रहा है। राज्य के 1350 से ज्यादा इंटर कालेज से ज्यादा इंटर कालेज में इस वक्त प्रधानाचार्य के एक हजार से पद रिक्त हैं। प्रधानाचार्य का फीडिंग कैडर हाईस्कूल का प्रधानाध्यापक है। लेकिन इस वक्त रिक्त पदों के अनुसार मानक पूरे करने वाले प्रधानाध्यापक न के बराबर हैं। प्रमोशन के लिए पात्र शिक्षक न मिलने पर सरकार ने इसमें 50 प्रतिशत पद यानि 693 पदों को विभागीय सीधी भर्ती से भरने का निर्णय किया है। लेकिन, शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग इसका विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि प्रधानाचार्य पद प्रमोशन का पद है। इसलिए रिक्त पदों को शतप्रतिशत पदोन्नति से ही भरा जाना चाहिए। सीधी भर्ती की प्रक्रिया के खिलाफ अब तक हाईकोर्ट में 56 रिट दायर हो चुकी हैं।
सूत्रों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया को न्यायिक विचाराधीन होने की वजह से सरकार दूसरे विकल्पों पर विचार कर रही है। प्रधानाचार्य भर्ती पर पेंच फंसने की स्थिति में प्रमोशन और प्रभारी व्यवस्था से ही इंटर कॉलेज की व्यवस्थाएं चलाई जाएंगी। प्रभारी प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त शिक्षक को राजपत्रित अधिकारी का दर्जा मिलने से वो अपने स्कूल के शिक्षक-कार्मिकों के वेतन आहरण वितरण का काम कर सकेंगे।
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