ओखलकांडा ब्लॉक की जिस जर्जर छीड़ाखान-मीडार सड़क पर शुक्रवार को नौ लोगों की जान गई। उसके डामरीकरण की कवायद से बीते 10 साल पहले शुरू हो गई थी, लेकिन बजट प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन बीते 10 सालों से सड़क निर्माण की फाइलें शासन की अलमारियों में धूल फांक रही हैं। हालांकि अंतिम बार बीते साल 29 नवंबर को भी इस जर्जर सड़क के डामरीकरण के लिए 974.29 लाख का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था, लेकिन इस प्रस्ताव पर भी शासन में बैठे जिम्मेदारों ने कोई रुचि नहीं ली।
भीमताल विधानसभा क्षेत्र के छीड़ाखान-मीडार सड़क आगे चलकर चम्पावत जिले के रीठा साहिब को जोड़ती है। एक तरह से यह सड़क इस दुर्गम इलाके की लाइफलाइन है। पर इसके बावजूद न नैनीताल जिला प्रशासन प्रयास कर रहा है और न ही जनप्रतिनिधियों के स्तर पर इस सड़क को ठीक करने की ठोस पैरवी हो पाई है। ‘हिन्दुस्तान’ ने शनिवार को जब लोक निर्माण विभाग से इस सड़क के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि अंतिम बार सड़क का डामरीकरण के लिए 2012 में किया गया था। लोनिवि ईई मोहन तिवारी ने बताया कि अंतिम बार 29 नवंबर 2022 को सड़क के डामरीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। शासन से 974.29 लाख की मांग की गई है।ओखलकांडा में हादसे के बाद छीड़ाखान मोटर मार्ग पर गड्ढों के भरान और टूटी दीवारों को सही कराने के लिए लोनिवि को आपदा मद से 47 लाख का बजट मिला है।दो मदों में गड्ढे भरने के लिए 32.78 लाख और दीवारों को सही करने को 14.97 लाख की धनराशि स्वीकृत हुई है। 26 किमी मार्ग के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा है।
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