सिलक्यारा सुरंग के अंदर फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने के लिए जारी रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच आज खुशखबरी सामने आ सकती है। गुरुवार को सुबह या दोपहर तक मजदूरों को बाहर निकाला जा सकता है। ऑगर मशीन से 800 एमएम व्यास वाले पाइप डालने का रेस्क्यू कार्य टनल के मलबे वाले हिस्से को भेदने के करीब पहुंचा है।
बुधवार देर शाम तक करीब 48 मीटर मलबे वाले हिस्से तक 800 एमएम व्यास वाले आठ पाइप डाले जा चुके हैं। जिस तेजी के साथ सुरंग के अंदर रेस्क्यू कार्य चल रहा था, अनुमान था कि देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त हो सकता है, लेकिन बताया जा रहा है कि अंदर ड्रिलिंग के दौरान सरिया लगने से मशीन का काम कुछ प्रभावित हुआ। जिसके चलते रेस्क्यू में बाधा आई है। हालांकि मशीन को फिर से चालू करने का काम किया जा रहा है। इसके लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम की भी मदद ली जा रही है। दोनों टीम रात आठ बजे सुरंग के अंदर गई हैं।
ऐसे में अब गुरुवार को रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त हो सकता है। देर शाम तक सुरंग के अंदर 800 एमएम व्यास के पाइप डालने का रेस्क्यू कार्य अंतिम दौर में पहुंच चुका था। रेस्क्यू कार्य जल्द खत्म होने की संभावना के बीच मौके पर 43 एंबुलेंस तैनात की गई हैं और डॉक्टरों सहित मेडिकल टीम भी मौके पर मौजूद है। मजदूरों के बाहर निकलते ही उनको सीधे चिन्यालीसौड़ सीएचसी पहुंचाने की तैयारी है। रेस्क्यू कार्य अंतिम दौर में पहुंचने के बाद मौके पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आर्मी, आईटीबीपी, बीआरओ और पुलिस बल सक्रिय हो गया है। मजदूरों के बाहर निकलने की संभावना के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी देर शाम मातली हेलीपैड उतरे। वे गुरुवार को मजदूरों से मुलाकात करने चिन्यालीसौड़ जाएंगे। धामी की सुबह सिलक्यारा पहुंचने की भी संभावना है। ये इस पर निर्भर करेगा कि रेस्क्यू कार्य कब तक पूरा होता है। चिन्यालीसौड़ में 41 बेड का अस्पताल भी तैयार किया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम मजदूरों का स्वास्थ्य परीक्षण करेगी। इससे पहले बुधवार शाम सवा चार बजे पीएमओ के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने रेस्क्यू प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि 45 मीटर तक ह्यूम पाइप्स अंदर पहुंचा दिए गए हैं। रेस्क्यू लगभग अंतिम दौर में है। सिर्फ 57 मीटर हिस्से तक ह्यूम पाइप पुश किए जाने हैं। इससे काफी हद तक साफ हो गया कि अब मजदूरों को जल्द बाहर निकाला जा सकता है
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