- नैनीताल भीमताल से फायर ब्रिगेड आने तक सब कुछ हो जाता है राख
- लकड़ी के पुराने मकानों पर मंडरा रहा खतरा
- कैंची धाम में हर दिन 20 हजार से ज्यादा लोगो की रहती है भीड़,
- सिर्फ मेले दौरान पहुँचता है अग्निशमन वाहन
भवाली। कैंची धाम व पर्यटन नगरी भवाली में आग जैसी आपदा से निपटने के लिए आज भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। नगर क्षेत्र में खुद का अग्निशमन वाहन तक उपलब्ध नहीं है। किसी भी अग्निकांड की स्थिति में नैनीताल या भीमताल से फायर ब्रिगेड की गाड़ी मंगानी पड़ती है, जिससे समय पर राहत कार्य शुरू नहीं हो पाता और तब तक बड़ा नुकसान हो जाता है। बीते वर्ष जून 2025 में भवाली बाजार क्षेत्र में लगी भीषण आग में कई दुकानें और मकान जलकर राख हो गए थे। इस घटना के बाद भी अग्निशमन व्यवस्था को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवाली बाजार क्षेत्र में आज भी करीब 90 फीसदी मकान और दुकानें पुराने लकड़ी के बने हुए हैं, ऐसे में आग लगने पर खतरा और बढ़ जाता है। कैंची धाम व्यापार मंडल अध्यक्ष दिनेश तिवारी ने बताया कि धाम में हर दिन 20 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं और उनकी सुरक्षा व्यवस्था के लिए सिर्फ 15 जून स्थापना दिवस के मौके पर ही अग्निशमन वाहन उपलब्ध रहता है इसके अलावा सिर्फ नैनीताल भीमताल के अग्निशमन वाहनो पर हो निर्भर रहना पड़ता है। कहा एक वाहन जल्द भवाली या कैंची धाम में खड़ा रहना चाहिए। स्थानीय वरिष्ठ व्यापारी सतीश पंत ने कहा कि भवाली से कैंची धाम तक आग बुझाने की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। अग्निकांड होने पर केवल नैनीताल और भीमताल से वाहनों के आने का इंतजार करना पड़ता है। जब तक फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंचती है, तब तक आग काफी नुकसान कर चुकी होती है। उन्होंने कहा कि बाजार क्षेत्र में पुराने बने फायर हाइड्रेंट का भी कोई पता नहीं है। जल संस्थान ने पिछले अग्निकांड के बाद भवाली चौराहे पर एक फायर हाइड्रेंट बनाया है, लेकिन पूरे बाजार और आसपास के क्षेत्रों के लिए यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
स्थानीय व्यापारियों ने प्रशासन से भवाली में स्थायी अग्निशमन वाहन तैनात करने, पुराने फायर हाइड्रेंट की जांच कराने और बाजार क्षेत्र में आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
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