मल्ली बाजार में आज भी निभाई जा रही पुरखों की परंपरा, तीन पीढ़ियों से जुड़ी है जलेबी बनाने की रस्म
भवाली। नगर के ऐतिहासिक नंदा देवी महोत्सव में आस्था और परंपराओं के साथ एक ऐसी मिठास भी जुड़ी है, जो करीब आठ दशक से लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। मल्ली बाजार में नंदा देवी महोत्सव के दौरान जलेबी बनाने की परंपरा पिछले 80 वर्षों से लगातार जारी है। पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन महोत्सव के मौके पर जलेबी बनाने की यह रस्म आज भी उसी उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
मल्ली बाजार स्थित दिनेश जोशी, योगेश जोशी की दुकान पर महोत्सव के दौरान विशेष रूप से जलेबी तैयार की जाती है। व्यापारी दिनेश जोशी बताते हैं कि उनके पिता पूरन चंद्र जोशी ने करीब 40 वर्षों तक नंदा देवी महोत्सव के दौरान जलेबी बनाने की परंपरा को निभाया। इसके बाद पिछले करीब 40 वर्षों से वह स्वयं इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
दिनेश जोशी के अनुसार, महोत्सव के दौरान उनकी दुकान पर बनने वाली जलेबी का लोगों को सालभर इंतजार रहता है। स्थानीय लोगों के साथ ही महोत्सव में पहुंचने वाले श्रद्धालु भी यहां जलेबी का स्वाद लेने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि जलेबी बनाने के लिए मुरादाबाद से दिनेश नाम के कारीगर वर्षों से भवाली आते हैं। महोत्सव के दौरान विशेष तैयारी के साथ जलेबी बनाई जाती है।
परंपरा बनी पहचान
नंदा देवी महोत्सव भवाली की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा आयोजन है। ऐसे में आठ दशक पुरानी जलेबी बनाने की यह परंपरा भी महोत्सव का एक अनूठा हिस्सा बन चुकी है। बदलते समय के साथ बाजार और खान-पान की चीजों में भले ही बदलाव आया हो, लेकिन मल्ली बाजार की इस दुकान पर महोत्सव के दिनों में जलेबी की खुशबू आज भी पुरानी यादों को ताजा कर देती है।
80 साल से जारी यह परंपरा केवल जलेबी बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भवाली के लोगों की भावनाओं, यादों और नंदा देवी महोत्सव से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन चुकी है।
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