सेनिटोरियम का शोध कर कुमाऊँ के चिकित्सा इतिहास को मिली नई दिशा

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  • टीबी सेनेटोरियम के इतिहास पर शोध कर सोनिया बनीं ‘डॉक्टर कुमाऊँ के चिकित्सा इतिहास को मिली नई दिशा

भवाली। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत की मेधावी शोध छात्रा कुमारी सोनिया पुत्री के आर आर्या ने कुमाऊँ के चिकित्सा इतिहास को केंद्र में रखकर किए गए अपने शोध कार्य से उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 25 फरवरी को डी.एस.बी. परिसर, नैनीताल में आयोजित पीएचडी की अंतिम वाइवा परीक्षा में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए उपाधि प्राप्त की। सोनिया का शोध विषय “कुमाऊँ के टी.बी. सेनेटोरियम का ऐतिहासिक अध्ययन” रहा, जो क्षेत्र के चिकित्सा, सामाजिक और औपनिवेशिक इतिहास पर आधारित एक महत्वपूर्ण एवं मौलिक शोध कार्य है। अपने अध्ययन में उन्होंने भवाली टी.बी. सेनेटोरियम की स्थापना वर्ष 1912 से लेकर उसके ऐतिहासिक, सामाजिक और चिकित्सीय योगदान का व्यापक विश्लेषण किया है।
ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में स्थापित यह संस्थान एशिया के प्रमुख क्षय रोग (टीबी) उपचार केंद्रों में से एक रहा है। शोध में विशेष रूप से ‘ओपन-एयर थेरेपी’ पद्धति पर प्रकाश डाला गया है, जिसके अंतर्गत हिमालय की शुद्ध वायु, सूर्य प्रकाश और प्राकृतिक वातावरण के माध्यम से रोगियों का उपचार किया जाता था। यह पद्धति उस दौर में टीबी जैसी गंभीर बीमारी के उपचार का प्रभावी माध्यम मानी जाती थी।
सोनिया का यह शोध केवल चिकित्सा इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर, स्वास्थ्य पर्यटन और ऐतिहासिक संरक्षण नीतियों के लिए भी एक मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुमाऊँ क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं के विकास क्रम को समझने में यह अध्ययन नई दृष्टि प्रदान करता है। सोनिया ने बताया कि वह अपने बारा पत्थर मल्लीताल नैनीताल में रहती है।
इस शोध कार्य का निर्देशन इतिहास विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. पंकज प्रियदर्शी ने किया। वाइवा परीक्षा के बाह्य परीक्षक के रूप में किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अमित कुमार सुमन उपस्थित रहे। वाइवा के दौरान इतिहास विभाग के समन्वयक एवं विभागाध्यक्ष प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. संजय टम्टा, डॉ. रितेश साह, डॉ. शिवानी रावत, डॉ. मनोज बाफिला, डॉ. शिवराज कपकोटी सहित अन्य शोधार्थी मौजूद रहे।
उपलब्धि पर महाविद्यालय परिवार ने शोध छात्रा और उनके शोध निर्देशक का भव्य स्वागत किया। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडे ने कहा कि सोनिया का यह शोध कुमाऊँ के चिकित्सा इतिहास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कार्य है और यह संस्थान के लिए गर्व का विषय है।
महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगणों ने शोध छात्रा एवं उनके शोध निर्देशक को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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