केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अंग्रजों के जमाने से चले आ रहे आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य कानूनों को बदलने के लिए शुक्रवार को लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए। इसके तहत मॉब लिंचिंग के लिए न्यूनतम सात वर्ष का कारावास और अधिकतम मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं, राजद्रोह कानून को पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है। सदन ने तीनों विधेयकों को विचार-विमर्श के लिए संसद की स्थायी समिति को भेज दिया है।
न्याय प्रणाली सुगम होगी गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि लंबे विचार-विमर्श और मंथन के बाद तीनों विधेयक लाए गए हैं। देश में गुलामी की सभी निशानियों को खत्म करने के मोदी सरकार के प्रण पर अमल करते हुए ये विधेयक लाए गए हैं। इनका मकसद लोगों के लिए न्याय प्रणाली को सुगम और सरल बनाना है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नए कानून का लक्ष्य सजा देना नहीं, बल्कि न्याय दिलाना है।
नफरती भाषण अपराध नफरती भाषण को अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। इसमें तीन साल की सजा का प्रावधान होगा। इसके अलावा, सात वर्ष या अधिक कारावास की सजा वाली धाराओं में अपराध स्थल पर फॉरेंसिक दल का दौरा अनिवार्य होगा। वहीं, पुलिस को 90 दिन में आरोप पत्र दायर करना होगा।
ये बदलाव होंगे
1. भारतीय दंड संहिता 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता, 2023 लेगी।
2. दंड प्रक्रिया संहिता 1898 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता होगी।
3. भारतीय साक्ष्य संहिता 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम होगा
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