हल्द्वानी स्थित वनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण करने वाले 50 हजार से अधिक लोगों के पुनर्वास के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को योजना बनाने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि उत्तराखंड के मुख्य सचिव केंद्र सरकार और रेलवे के साथ इस मुद्दे पर बैठक करें।
शीर्ष अदालत ने कहा कि हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के विकास और रेल लाइन स्थानांतरित/विस्तार के लिए वहां रह रहे लोगों को जमीन से बेदखल करने से पहले उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करना चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और उज्जल भुइयां की पीठ ने रेलवे की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। रेलवे ने अर्जी में सुप्रीम कोर्ट के पांच जनवरी, 2023 के उस आदेश में संशोधन की मांग की है, जिसके तहत रेलवे को हल्द्वानी में उसकी जमीन पर कब्जा करके दशकों से रह रहे लोगों को हटाने पर रोक लगा दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा है कि उत्तराखंड सरकार को योजना बनानी होगी कि उन लोगों का पुनर्वास कब, कैसे और कहां किया जाएगा।
वे भी इंसान, अदालतें निर्दयी नहीं: जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आखिरकार, सैकड़ों परिवार दशकों से इस भूमि पर रह रहे हैं। वे भी इंसान हैं और अदालतें निर्दयी नहीं हो सकतीं। अदालतों को संतुलन बनाए रखने की जरूरत है और राज्य को कुछ करने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और रेलवे से यह भी सवाल किया कि यदि लोगों ने रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण किया है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई
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