सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में उत्तराखंड के भीमताल के जिलिंग स्टेट में बन रही लग्जरी विला/ रिजोर्ट के निर्माण की अनुमति देने के उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया है। शीर्ष कोर्ट के इस फैसले के बाद दोबारा करीब 90 एकड़ में बन रही इस परियोजना के निर्माण कार्य पर रोक लग गई है। उच्च न्यायालय ने विला और रिजोर्ट के निर्माण पर पहले रोक लगा दी थी। लेकिन, सितंबर, 2023 को अपने आदेश को वापस लेकर परियोजना के निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी थी।
जस्टिस बीआर गवई और संदीप मेहता की पीठ ने बीरेंद्र सिंह की ओर से अधिवक्ता पीबी सुरेश और विपिन नायर द्वारा दाखिल विशेष अनुमति याचिका का निपटारा करते हुए यह आदेश दिया है। पीठ ने कहा, मामले में पर्यावरण से जुड़ा होने का हवाला देते हुए यह आदेश दिया है। इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरेश और नायर ने पीठ को बताया, परियोजना के निर्माण को किसी भी तरह की पर्यावरण मंजूरी नहीं ली है। उन्होंने पीठ के समक्ष आरोप लगाया गया था कि पर्यावरण हितों की अनदेखी कर संवेदनशील जगह पर लग्जरी विला/ रिजोर्ट बनाया जा रहा है, जहां पर हैलीपेड का निर्माण किया जा रहा है। रिपोर्ट के बाद निर्माण पर रोक लगा दी थी मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सितंबर, 2022 को गूगल मैप और भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी वीके शर्मा की रिपोर्ट के बाद लक्जरी टाउनशिप परियोजना के निर्माण पर रोक लगा दी थी। हालांकि, उच्च न्यायालय ने सितंबर 2023 को अपने आदेश में संशोधन कर कुछ शर्तों के साथ आंशिक निर्माण की अनुमति दे दी थी।
पहले भी एनजीटी के समक्ष उठाया था मामला
याचिकाकर्ता सिंह ने पहले इस मामले को एनजीटी के समक्ष भी उठाया था। एनजीटी में उन्होंने आरोप लगाया था कि जिलिंग स्टेट में लक्जरी टाउनशिप विला परियोजना के तहत कंक्रीट का निर्माण किया जा रहा है। याची को एनजीटी से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। बाद में शीर्ष कोर्ट ने मामला उच्च न्यायालय भेज दिया। हाईकोर्ट ने 2022 में परियोजना के निर्माण पर रोक लगा थी दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने रोक लगाने के आदेश को वापस लेकर निर्माण की अनुमति दे दी थी।
सुनवाई बगैर अनुमति देना उचित नहीं
शीर्ष अदालत ने आदेश में कहा कि मामला उच्च न्यायालय में लंबित है, ऐसे में सुनवाई पूरी किए बगैर लग्जरी आवासीय परियोजना के निर्माण की अनुमति देना उचित नहीं है। शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय द्वारा निर्माण की अनुमति देने के आदेश को रद्द करते हुए उच्च न्यायालय को तीन माह के भीतर मामले की सुनवाई पूरी करने और उचित फैसला पारित करने को कहा है।
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