नई आबकारी नीति के तहत राज्य के नौ पर्वतीय जिलों और दो जिलों की पांच तहसीलों में दुकानदार शराब के ठेके की एक-एक ब्रांच भी खोल सकेंगे। इसके लिए उन्हें मुख्य ठेके के राजस्व का पांच प्रतिशत अतिरिक्त चुकाना होगा। सरकारी राजस्व बढ़ाना इसका मुख्य उद्देश्य हैं।
मैदान की अपेक्षा पहाड़ में शराब की बिक्री कम होती है। पहाड़ में दूर-दराज में सरकारी ठेके होने के कारण लोग वहां तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। वहीं दूसरी ओर पिछले वित्तीय वर्ष में राजस्व नहीं चुकाने पर राज्य में कई अनुज्ञापियों को कुर्की और जमीनों की नीलामी भी सहनी पड़ी थी। इसे देखते हुए इस बार राज्य के नौ पर्वतीय जिलों में शराब का ठेका हासिल करने वाले ठेकेदार ठेके की एक-एक ब्रांच भी खोल सकते हैं। नए नियम के अनुसार उप दुकान खोलने के लिए दुकानदार को डीएम की संस्तुति लेनी होगी। शराब के ठेके की ब्रांच का अनुमोदन आबकारी आयुक्त करेंगे।
हरिद्वार और यूएस नगर में शराब की उप दुकान खोलने की अनुमति नहीं होगी। वहीं देहरादून की कालसी, चकराता, नैनीताल की बेतालघाट, धारी, कोश्याकुटौली तहसील और राज्य के नौ जिलों में उप दुकान खोल सकते हैं।
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