एक तरफ तो हम चांद मै घर बनने की बात करते हैँ, घर घर तक रोड, घर घर तक मोबाइल पहुंच चुका हैँ, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और हि है, आज भी उत्तराखण्ड के कई गाव ऐसे है जहा मरीजों और गर्भवती महिलाओ को 7 से 8 किलोमीटर् डोली बैठा कर पैदल सड़क तक पहुंचाया जा रहा है, इसी मै से एक मुनस्यारी विकासखंड का गाव है रुइसपाटा जहा एक गर्भवती महिला को सड़क ना होने की वजह से डोली मै ले जाया जा रहा था और लगभग् डोली मै 3 किलोमीटर ले जाने के बाद रास्ते मै हि प्रस्व पीड़ा सुरु होने से नदी किनारे हि महिला का प्रसव कराना पड़ा, महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया लेकिन सुविधाओ का आभावन होने की वजह से मा को अपने एक बच्चे से हाथ धोना पड़ा, एक बच्चे ने मोके पर हि दम तोड़ दिया, रुइसपाटा गाव आज भी सड़क से 6 किलोमीटर दूर है यहा के लोगो को सड़क तक पहुंचने के लिए करना पड़ता है 6 किलोमीटर उबड़ खबड़ रास्तो का पैदल सफर,वही ग्रामवाशी अजय दसोनी का कहना है ये कोई पहला मामला नही है पहले भी रोड ना होने से ऐसी कई घटनाये हो चुकी हैँ, प्रशासन और सरकार को इसका संज्ञान लेना चाइये और हमे जरुरि सुविधाये मुहैया करवानी चाइये
जिला अधिकारी रीना जोशी ने बताया की आज हि उनके संज्ञान मै ये मामला आया है और जितने भी ऐसे गाव है जहा रोड नही है उनकी सूची बना कर उनको चिन्नीत कर वहा ग्रामीण विभाग या pwd विभाग के द्वारा आंगडन तैयार करवाया जा रहा हैँ। ताकी वहा रोड पहुंचाईयी जा सके।
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