निजी अस्पताल लंबे समय तक मरीज को नही रख पाएंगे वेंटिलेटर पर

ख़बर शेयर करें

निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर के नाम पर भारी-भरकम बिल वसूली को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अगर किसी मरीज को 14 दिनों से ज्यादा समय तक वेंटिलेटर पर रखा जाता है तो अस्पताल को इसका कारण बताना होगा।

ऐसे मामलों की विशेष डॉक्टरों की समिति समीक्षा करेगी और हर महीने इसका आंतरिक ऑडिट भी करना होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब डॉक्टरों को हर 48-72 घंटे में मरीज की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करना होगा। अगर सुधार की संभावना कम है तो परिजनों के साथ काउंसलिंग करनी होगी। सरकार का कहना है, इस कवायद से अनावश्यक रूप से वेंटिलेटर पर मरीज को लंबे समय तक रखने पर रोक लगेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि वेंटिलेटर जरूरत पड़ने पर जान बचाता है, लेकिन बिना जरूरत लंबे समय तक इसका इस्तेमाल न सिर्फ खर्च बढ़ाता है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है।

यह भी पढ़ें 👉  रामगढ इंटर कॉलेज में युवाओं ने दिखाया हुनर

समिति ने की थी सिफारिश : भाजपा सांसद डॉ. आनंद कुमार ने अगस्त में लोकसभा में निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में वेंटिलेटर उपयोग में पारदर्शिता के लिए दिशा-निर्देशों बनाने की जरूरत पर जोर दिया था। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. सुजाता चौधरी की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति बनाई गई। समिति में एम्स, सफदरजंग अस्पताल और राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर शामिल थे। इस समिति ने दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दिया है।

Join WhatsApp Group

You cannot copy content of this page