लड़की पक्ष की तरफ से किसी भी तय शादी की पहली शर्त लड़के की नौकरी, आर्थिक रूप से मजबूत और सुरक्षित भविष्य होती है। इस दायरे से बाहर के युवकों के हाथ में अपनी बेटी का हाथ कोई भी माता-पिता नहीं देना चाहता। पिथौरागढ़ में आर्थिक रूप से कमजोर ऐसे युवाओं को अब दुल्हन तलाशने नेपाल तक जाना पड़ रहा है। हालांकि भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी के संबंध सदियों से हैं लेकिन बीच के सालों में इसमें भारी कमी आ गई थी। अब बेरोजगारी के कारण फिर पड़ोसी देश से दुल्हन लाने वालों की संख्या बढ़ गई है।
चीन के नेपाल में दखल के बाद और कोरोना के कारण भारत-नेपाल के संबंध बुरी तरह प्रभावित हुए। चीन के बहकावे में नेपाल, भारत पर तरह-तरह के प्रतिबंध अपने देश में लगाता रहा है। इससे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों के संबंध भी खराब हुए हैं। यही वजह रही कि बीते कई सालों म रिश्तेदारी बढ़ाने की परंपरा खत्म जैसी हो गई थी। झूलाघाट व्यापार संघ के महासचिव हरीबल्लभ भट्ट कहते हैं, बीते कुछ समय में नेपाल जाने वाली बारातों का सिलसिला एकाएक बढ़ गया है। हालांकि नेपाल बारात ले जाने वाले सभी दूल्हे या तो बेरोजगार हैं या आर्थिक रूप से कमजोर। नेपाल के कारोबारी प्रकाश थापा का कहना है कि भारत से दुल्हन बनकर यहां कम लड़कियां आती हैं।
लेटैस्ट न्यूज़ अपडेट पाने हेतु -
👉 वॉट्स्ऐप पर हमारे समाचार ग्रुप से जुड़ें

