नासा के “भारत के एस्ट्रोनॉट मेकर” डॉ. रवि मार्गसहायम का ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में प्रेरणादायक सत्र

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ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में उस समय गर्व का माहौल था जब विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं नासा के केनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा (अमेरिका) में स्पेस शटल एवं स्टेशन कार्यक्रमों से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रवि मार्गसहायम ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्हें “भारत के एस्ट्रोनॉट मेकर” के नाम से भी जाना जाता है।

डॉ. मार्गसहायम का स्वागत भीमताल परिसर के निदेशक द्वारा पौधारोपण कर सम्मानपूर्वक किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में ग्राफिक एरा डीम्ड दू बी यूनिवर्सिटी, देहरादून के एयरोस्पेस विभागाध्यक्ष प्रो. सुधीर जोशी ने डॉ. मार्गसहायम के प्रेरणादायक जीवन और उपलब्धियों का परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने कैसे कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स जैसी महान अंतरिक्ष यात्रियों के मिशनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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डॉ. मार्गसहायम ने अपने बचपन की एक मार्मिक स्मृति साझा की जब उनकी माँ उन्हें “पुष्पक विमान” की कहानियाँ सुनाया करती थीं। उस समय उन्हें वह कल्पना लगती थी, पर जब उन्होंने नासा के लॉन्च पैड से स्पेस शटल को उड़ान भरते देखा, तो उन्हें माँ की बातें याद आ गई “माँ हमेशा सही होती हैं।”

कल्पना चावला से जुडी अपनी यादों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनके और कल्पना के सपने समान थे -अंतरिक्ष को जानने और छूने का। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “मैं हर दिन रोता हूँ, आज भी दिल रोता है हम उन्हें वापस नहीं ला सके।”

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उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि जीवन में बड़े सपने देखें और उन्हें साकार करने का साहस रखें। उनका प्रेरणादायक मंत्र था – “सोचो, विश्वास करो, सपना देखो और साहस करो।”

इसी क्रम में उन्होंने बताया कि कैसे एक बार एक अंतरिक्ष यान की उड़ान तकनीकी कारणों से असफल रही, लेकिन यात्रिों की सुरक्षित वापसी ने उसे ‘सफल असफलता’ में बदल दिया।

डॉ. मार्गसहायम ने अंतरिक्ष अभियानों से जुड़े कई रोमांचक वीडियो दिखाए जिनमें कल्पना चावला के 1997 के ऐतिहासिक मिशन, मानवता की उत्पति और नासा की नवीनतम तकनीकी उपलब्धियों शामिल थीं।

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उन्होंने छात्रों से भावनात्मक और नैतिक मूल्यों को अपनाने की अपील की और कहा, “जीवन में हार मत मानो। हम गलतियों करते हैं, और हज़ार सफलताओं से ज्यादा ज़रूरी है गलतियों से सीखना।”

सत्र का समापन प्रश्नोतर सत्र और सम्मान चिन्ह भेंट कर किया गया। परिसर निदेशक द्वारा डॉ. मार्गसहायम को स्मृति चिह्न प्रदान किया गया, जिससे यह दिन सभी उपस्थितों के लिए अविस्मरणीय बन गया।

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