धारी।
तिमूर मिशन के तहत रामगढ़ व धारी में 5 हजार पौधे रोपे गये।
पर्यावरण संरक्षण और औषधीय पौधों के महत्व को ध्यान में रखते हुए तिमुर, गुड़हल, करकड़सिंगी (कर्कटशृंगी) और गिलोय के पौधों का रोपण किया गया।
गुरुवार को धारी क्षेत्र के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भलूगाड़ जलप्रपात क्षेत्र परिसर में एक दिवसीय जागरूकता सह पौधरोपण अभियान आयोजित किया गया ।
यह अभियान क्षेत्र की 3 वन पंचायतों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
ये वन पंचायते बुरांशी, गजार, चौखुटा हैं। इन वनपंचायतों का संयुक्त भालूगाड़ जलप्रपात समिति है।
अभियान में स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और समिति के सभी सदस्यों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और श्रमदान किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे रुद्रपुर डाबर कम्पनी के तकनीकी विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार यादव ने ग्रामीणों को औषधीय पौधों की पहचान, उनकी सही देखभाल और वैज्ञानिक रोपण तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।
वहीं टेरी संस्था (TERI) के प्रतिनिधि प्रवीन शर्मा ने औषधीय पौधों के व्यावहारिक उपयोग और मार्केटिंग में इनकी बिक्री की संभावनाओं पर मार्गदर्शन दिया , जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा मिल सके।
सामाजिक कार्यकर्ता जितेन्द्र सिंह रैक्वाल ने बताया
ककड़सिंगी, जिसे आयुर्वेद में कर्कटशृंगी भी कहा जाता है, एक शक्तिशाली जड़ी-बूटी है जो मुख्य रूप से हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है। इसके औषधीय गुण इसे श्वसन, पाचन, और सूजन संबंधी समस्याओं के लिए प्रभावी है।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में उगने वाला तिमूर अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। यह ब्लड प्रेशर नियंत्रण, पाचन सुधार, दर्द निवारण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।
यह अभियान रामगढ़ क्षेत्र के वनपंचायत दाडिमा, वनपंचायत पिछटाना,सकूना के साथ धारी के वन पंचायत बुरांशी, गजार, चौखुटा में आयोजित किया जा रहा है।
तिमूर मिशन के तहत रामगढ़ व धारी 15 हजार औषधीय पौधे लगाने का लक्ष्य है।
यह कार्यक्रम 3 वर्षों से संचालित किया जा रहा है जिसमें टेरी संस्था द्वारा पर्वतीय किसानों औषधीय पौधों की खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
यहाँ पर्यावरण बचाएं, औषधीय पौधों को अपनाएं का संदेश दिया गया ।
इस मौके पर डॉ. विजय कुमार यादव,प्रवीन शर्मा,जितेन्द्र सिंह रैक्वाल,
सरपंच भवान सिंह ,हरेंद्र सिंह, राजेन्द्र सिंह, नारायण सिंह मेहता, पूरन सिंह, पान सिंह मौजूद रहे।
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