.भवाली ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में 82 लाख की मशीनें धूल फांक रहीं

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  • केमिकल और स्टाफ के अभाव में ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट की अत्याधुनिक मशीनें बंद
  • 47 लाख के भवन में भी बारिश से सीलन

भवाली। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) में लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई अत्याधुनिक जांच मशीनें अब बदहाली का शिकार हैं। करीब 82 लाख रुपये की मशीनें मौजूद होने के बावजूद मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। केमिकल और आवश्यक स्टाफ की कमी के कारण जांच का काम ठप पड़ा है। बीपीएचयू में अरबा ईएम-200 फुली ऑटोमेटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर लगाया गया है। इससे शुगर, लिपिड प्रोफाइल, लिवर और किडनी समेत कई महत्वपूर्ण जांच की जा सकती हैं। इसके अलावा फुली ऑटोमेटिक ईएसआर एनालाइजर और हेमेटोलॉजी सेल काउंटर हेमेकलाजी एच-360 जैसी मशीनें भी उपलब्ध हैं। लेकिन मशीनों को संचालित करने के लिए जरूरी केमिकल उपलब्ध नहीं होने से ये मशीनें बंद पड़ी हैं।

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स्टाफ के अभाव में भी ठप है व्यवस्था

मशीनों के संचालन के लिए पैथोलॉजिस्ट, चार टेक्नीशियन, एक डाटा एंट्री ऑपरेटर और एक अटेंडेंट की आवश्यकता है, लेकिन इन पदों पर पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध नहीं होने से लैब का संचालन प्रभावित है। मशीनें स्थापित हुए वर्षों बीत चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इनका नियमित संचालन सुनिश्चित नहीं कर सका है। बताया गया कि वर्ष 2023 में ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट में मशीनें स्थापित की गई थीं। इसके बाद से मशीनों को नियमित रूप से संचालित कराने और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।

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47 लाख के भवन में बारिश की मार

वहीं करीब 47 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट के भवन की हालत भी खराब होने लगी है। बारिश के मौसम में भवन में सीलन आ गई है। इससे लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए स्वास्थ्य केंद्र की गुणवत्ता और रखरखाव पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
लाखों की मशीनें, फिर भी मरीजों को बाहर जांच
एक तरफ सरकार ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लाखों रुपये खर्च कर अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी तरफ केमिकल और स्टाफ जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं होने से मशीनों का उपयोग ही नहीं हो पा रहा है। ऐसे में स्थानीय मरीजों को सामान्य जांच के लिए भी अन्य अस्पतालों या निजी पैथोलॉजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मशीनें और भवन उपलब्ध हैं तो विभाग को आवश्यक केमिकल और विशेषज्ञ स्टाफ की व्यवस्था कर लैब को तत्काल शुरू करना चाहिए, ताकि सरकारी धन का सदुपयोग हो और मरीजों को स्थानीय स्तर पर जांच की सुविधा मिल सके।

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कोट…

स्टाफ और केमिकल की कमी से मशीनें सालों से बन्द पड़ी है। 2023 में यूनिट बनाई गई थी। सभी चीजों के लिए उच्य अधिकारियों को पत्र भेजा गया है।

डॉ रमेश कुमार, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी भवाली

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