साल के पहले क्वाडेंटिडिस उल्कापात का समय शुरू हो चुका है। 12 जनवरी तक हर रात आपको आसमान में टूटते तारों की बारिश नजर आएगी। लेकिन मैदानों में इन दिनों पड़ रहे कोहरे और प्रदूषण के कारण इन सुंदर नजारों का मजा नहीं मिल पाएगा। ऐसे में इस सुंदर नजारे को देखने पहाड़ों पर आना होगा।
नैनीताल स्थित आर्य भट्ट प्रेषण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के पब्लिक आउटरीच प्रभारी डॉ. विरेंद्र यादव के अनुसार क्वाडेंटिडिस उल्कापात का यह नाम तारामंडल क्वाड्रन्स मुरलिस से लिया गया है। यह एक फ्रांसीसी खगोलशास्त्रत्त्ी जेरोम लालांडे द्वारा खोजा गया पूर्वी तारामंडल है। इस दिशा से ही उल्काओं की बारिश होती है। आसमान में जितना अधिक अंधेरा होगा उल्कापात उतना ही साफ, चमकदार नजर आएगा। इसलिए रोशनी से दूर और अंधेरी रातों में ही उल्कापात के सबसे अच्छे दृश्य नजर आते हैं।
आसमान साफ होना जरूरी अंतरिक्ष की गहराइयों में झांकने के लिए रोशनी और हवा का प्रदूषण स्तर बेहद कम होना चाहिए। मैदानी इलाकों में दोनों ही तरह के प्रदूषण का स्तर काफी अधिक होता है। जबकि पहाड़ की ऊंचाइयों में साफ हवा के साथ रोशनी का प्रदूषण भी कम होता है। जिससे आसमान ज्यादा साफ नजर आते हैं।
उत्तराखंड में बढ़ रहे एस्ट्रो टूरिज्म के केंद्र उत्तराखंड में एस्ट्रो टूरिज्म के केंद्र तेजी से बढ़ रहे हैं। नैनीताल सहित प्रदेश के कई हिस्सों में कई कंपनियां केवल एस्ट्रो टूरिज्म पर ही काम कर रही हैं। ऐसे में खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष में रुचि रखने वालों को यह अच्छा अवसर उपलब्ध करवा रही हैं। यह कंपनियां लोगों को उपकरणों के साथ इस तरह के नजारे देखने वाले स्थान भी चिन्हित करके देती हैं जहां से अंतरिक्ष के सुंदर दिखते हैं।
हर घंटे 80 से 100 तारे टूटते दिखेंगे
पहाड़ों पर दिन में चटख धूप और रात को अंधेरे आसमान के कारण उल्कापात और अंतरिक्ष के सबसे अच्छे नजारे देखने को मिलेंगे। पांच जनवरी की रात साढ़े 12 बजे से क्वाडेंटिडिस उल्कापात अपने चरम पर होगा। जब हर घंटे आपको 80 से 100 टूटते तारे नजर आएंगे।
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