मेरे सपनों का देहरादून’ विषय पर बच्चों ने लिखे रोचक निबंध

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‘मेरे सपनों का देहरादून’ विषय पर बच्चों ने लिखे रोचक निबंध
बालप्रहरी की कार्यशाला में नुक्कड़ नाटक, कहानी और कविता लेखन से निखरी बच्चों की प्रतिभा
देहरादून। दून लाइब्रेरी में आयोजित पांच दिवसीय बाल लेखन कार्यशाला के चौथे दिन बच्चों ने ‘मेरे सपनों का देहरादून’ विषय पर निबंध लिखकर अपने सपनों के शहर की तस्वीर प्रस्तुत की। बच्चों के निबंधों में शहर को बेहतर बनाने की उम्मीदें और अपेक्षाएं नजर आईं। इस दौरान बच्चों ने समसामयिक विषयों पर नुक्कड़ नाटक तैयार करने के साथ ही कहानी, कविता, चुटकुले और पहेलियां भी लिखीं।
अल्मोड़ा से प्रकाशित बच्चों की पत्रिका बालप्रहरी, भारत ज्ञान विज्ञान समिति और देहरादून किताब कौतिक आयोजन समिति की ओर से अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से कार्यशाला आयोजित की जा रही है। चौथे दिन की शुरुआत बच्चों ने समूह गीत ‘मैं तुमको विश्वास दूं’ से की। बालप्रहरी के संपादक उदय किरौला ने बच्चों को यात्रा वृत्तांत लेखन की जानकारी दी। इसके बाद बच्चों ने अपने यात्रा अनुभवों को लेख के रूप में प्रस्तुत किया।
कार्यशाला में नुक्कड़ नाटक के लिए चयनित बच्चों ने महज 10 मिनट में ‘मोबाइल टन टनाटन टन’ नाटक के संवाद स्वयं तैयार किए। इसके अलावा बच्चों ने नेताजी की खोज, तोता कहता है, जैसा मैं कहूं, कितना बड़ा पहाड़ और पिज्जा हट जैसे रोचक खेलों में प्रतिभाग किया। बच्चों ने अलग-अलग समूहों में काम करते हुए अपनी हस्तलिखित पुस्तकों के लिए निबंध, कहानियां, कविताएं, चुटकुले और पहेलियां तैयार कीं।
नुक्कड़ नाटक में उदय किरौला और डॉ. चंद्रकला भंडारी, बाल कवि सम्मेलन में प्रकाश चंद्र पांडेय और अदिति जखमोला, समूह गीत में डॉ. शशिकला और सुमन सेमवाल ने बच्चों का मार्गदर्शन किया। वहीं, दीवार पत्रिका निर्माण में कुसुम वर्तवाल और धर्मेंद्र सिंघल ने संदर्भदाता की भूमिका निभाई। मुकेश नौटियाल और डॉ. सुरेंद्र सेमल्टी ने बच्चों को कहानी लेखन की बारीकियां सिखाईं।
दीवार पत्रिका ‘बाल दर्पण’ का लोकार्पण
डॉ. शशिकला के संपादन में तैयार दीवार पत्रिका ‘बाल दर्पण’ का अतिथियों ने लोकार्पण किया। इस अवसर पर दून लाइब्रेरी के प्रो. बीके जोशी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए लक्ष्य निर्धारित करना और उसकी प्राप्ति के लिए योजनाबद्ध रणनीति तैयार करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चों की प्रतिभा निखारने और उन्हें अपनी बात मौखिक एवं लिखित रूप में व्यक्त करने का अवसर देने में ऐसी कार्यशालाएं मील का पत्थर साबित होती हैं।
कार्यक्रम में एन. रविशंकर, श्याम सरन, विजय भट्ट, योगेंद्र नेगी, संदीप ढैला, डीके पांडेय और सुंदर सिंह बिष्ट सहित अन्य लोग मौजूद रहे। कार्यशाला का समापन समारोह 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे दून लाइब्रेरी में आयोजित किया जाएगा। आयोजकों ने साहित्य प्रेमियों और शुभचिंतकों से समारोह में शामिल होने की अपील की है।

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