ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल में पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का शुभारंभ

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भीमताल, 29 जून। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट द्वारा सीसीडीएल-जीईएचयू के सहयोग से “शोध उत्कृष्टता का निर्माण: शोध प्रस्ताव से प्रकाशन एवं केस अध्ययन विकास तक” विषय पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं शोधकर्ताओं को उच्च गुणवत्ता वाले शोध, परियोजना प्रस्ताव लेखन, शोध प्रकाशन तथा केस अध्ययन विकास की नवीनतम तकनीकों से परिचित कराना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए भीमताल परिसर के निदेशक ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया तथा उपस्थित विशेषज्ञ वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संकाय विकास कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान, कौशल और शोध क्षमता को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने परिणाम-आधारित शिक्षण पर बल देते हुए प्रतिभागियों से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में लागू करने और अपने व्यावसायिक विकास में उपयोग करने का आह्वान किया।

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प्रथम तकनीकी सत्र में मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी), जयपुर की प्रोफेसर मंजू सिंह ने “परियोजना एवं शोध प्रस्ताव लेखन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने शोध परियोजनाओं के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता, प्रभावी शोध प्रस्ताव तैयार करने की रणनीतियां, शोध सार लेखन, समस्या विवरण, साहित्य समीक्षा, शोध उद्देश्य, कार्यप्रणाली, परियोजना समय-सीमा, डेटा प्रबंधन, नैतिक अनुमोदन, संस्थागत संसाधन, बजट निर्माण तथा परियोजना मूल्यांकन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने बताया कि एक प्रभावशाली शोध सार केवल 300 शब्दों में समीक्षक का ध्यान आकर्षित करने में सक्षम होना चाहिए।

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द्वितीय तकनीकी सत्र में चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान (नियाम), जयपुर की निदेशक डॉ. हेमा यादव ने “कृषि एवं सहकारिता में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित जन-केंद्रित पहलें: सरकारी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना से उभरते शोध क्षेत्रों तक” विषय पर विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने उत्तराखंड के एक प्रेरक उदाहरण के माध्यम से बताया कि किस प्रकार एक स्मार्टफोन ने राजमा की कीमतों तक किसानों की पहुंच को बदल दिया और डिजिटल तकनीक ने ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी। उन्होंने डिजिटल कृषि, “सहकार से समृद्धि”, साइबर सुरक्षा एवं डेटा गोपनीयता, ब्लॉकचेन एवं ट्रेसबिलिटी तथा कृषि स्टार्टअप्स और नवाचार को बढ़ावा देने में नवाचार एवं उद्यमिता महासंघ की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों के उत्तर प्राप्त किए। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. निधि भट्ट पंत ने किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों ने कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान को अपने शोध एवं शिक्षण कार्य में लागू करने का संकल्प व्यक्त किया तथा आगामी सत्रों के प्रति उत्साह जताया।

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