लैंड फ्रॉड के 30 मामलों में एफआईआर की संस्तुति, नैनीताल के 17 प्रकरण शामिल
मल्टीपल रजिस्ट्री और बिना सत्यापन दाखिल-खारिज पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी: आयुक्त
हल्द्वानी, 22 जून।
कुमाऊं मंडल में भूमि धोखाधड़ी (लैंड फ्रॉड) के मामलों पर प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। सोमवार को सर्किट हाउस काठगोदाम में आयोजित लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक में कुल 30 मामलों में एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की गई। इनमें नैनीताल जिले के 17, ऊधमसिंह नगर के 12 और अल्मोड़ा जिले का एक मामला शामिल है।
आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में तीनों जिलों से लैंड फ्रॉड से जुड़े कुल 77 प्रकरणों की समीक्षा की गई। आयुक्त ने अधिकारियों को लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए।
बैठक में आयुक्त ने बैंकों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि संपत्ति को बंधक रखकर ऋण देने के बाद यदि वह संपत्ति बेची जाती है तो बैंक को इसकी जानकारी होना आवश्यक है। नियमों की अनदेखी करने वाले बैंक भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
उन्होंने कहा कि एक ही संपत्ति की कई बार रजिस्ट्री (मल्टीपल रजिस्ट्री) के मामलों को रोकने के लिए रजिस्ट्रार और सब-रजिस्ट्रार की जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं दाखिल-खारिज से पहले लेखपाल द्वारा मौके का निरीक्षण नहीं करना गंभीर लापरवाही है। बिना भौतिक सत्यापन के भूमि रिकॉर्ड में बदलाव होने से विवाद और धोखाधड़ी की स्थिति पैदा होती है।
आयुक्त ने निर्देश दिए कि रिकॉर्ड में दर्ज भूमि और मौके की वास्तविक स्थिति में किसी भी अंतर को दूर किया जाए, ताकि आम लोगों को भूमि विवादों का सामना न करना पड़े।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ऊधमसिंह नगर नितिन भदौरिया, एसएसपी नैनीताल मंजूनाथ टीसी, एसएसपी ऊधमसिंह नगर अजय कुमार गणपति सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अल्मोड़ा जिलाधिकारी अंशुल सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल
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