सिलक्यारा में मौत को मात देकर निकले, घर में पिता ने तोड़ा दम

ख़बर शेयर करें

सिलक्यारा में मौत को मात देकर निकले सभी 41 मजदूर एम्स ऋषिकेश में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इनमें शामिल झारखंड के डुमरिया का रहने वाला भुक्तू मुर्मु अपने पिता बासेत मुर्मु के निधन की समाचार से बेखबर है। भुक्तू की बहन ने उसे पिता के बीमार होने को लेकर जानकारी दी थी।

गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार

बासेत मुर्मु का मंगलवार देर शाम गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुत्र भुक्तू मुर्मु के तत्काल लौटने की कोई उम्मीद नहीं थी। सुरंग से निकले सभी मजदूरों को बुधवार को ऋषिकेश के एम्स अस्पताल भेजा गया। ऐसे में बासेत मुर्मु को मुखाग्नि उनके एक अन्य पुत्र मंगल मुर्मु ने दी।

यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड पुलिस के दो अधिकारियों को मिला सम्मान, डॉ. जगदीश चंद्र को राष्ट्रपति पुलिस पदक और हरबन्स सिंह को गोल्ड मेडल

तीन भाइयों में मझला है भुक्तू

डुमरिया प्रखंड के बांकीशोल पंचायत के कुंडालुका बहदा गांव निवासी बासेत उर्फ बरसा मुर्मु के तीन पुत्र हैं। बड़ा पुत्र राम राय मुर्मु चेन्नई में काम करता है। वहीं, भुक्तू उत्तराखंड में सुरंग बनाने का काम कर रहा था, जबकि छोटा पुत्र मंगल मुर्मु घर पर रह मजदूरी करता है।

डुमरिया(जमशेदपुर), संवाददाता। डुमरिया का भुक्तू मुर्मु मंगलवार को सुरंग से जिंदगी की जंग जीतकर निकला लेकिन गांव में उसके इंतजार में पिता बासेत मुर्मु के जीवन की डोर टूट गई। भुक्तू अब कभी अपने पिता से नहीं मिल पाएगा। भुक्तू के गांव पहुंचने में समय लगते देख बासेत का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

यह भी पढ़ें 👉  दीपावली पर अग्निशमन विभाग अलर्ट, हल्द्वानी में दो स्थानों पर मॉक ड्रिल कर परखी तैयारियां

भुक्तू के 70 साल के वृद्ध पिता बासेत उर्फ बरसा मुर्मू मंगलवार सुबह घर में खाट पर बैठे थे। इस दौरान वे अपने दामाद ठाकरा हांसदा से सुरंग में फंसे अपने बेटे के बारे में पूछ रहे थे कि अचानक वह खाट से गिर पड़े और उनकी मौत हो गई।

बेटे के गम में खो बैठे थे सुध-बुध गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने वाले बासेत, सिलक्यारा की सुरंग हादसे में भुक्तू के फंसने की खबर के बाद से सुध-बुध खो बैठे थे। हर दिन गांव में सबसे बस एक ही प्रश्न पूछते कि भुक्तू कब निकलेगा। रोज रेस्क्यू में कुछ न कुछ अड़चन आने से भी वे टूट से गये थे। प्रशासन से भी उनके परिवार को मदद नहीं मिल रही थी। 17वें दिन मंगलवार देर शाम भुक्तू के सुरंग से सुरक्षित बाहर निकलने की खबर मिलने से पहले ही वह दुनिया छोड़कर चल बसे।

Join WhatsApp Group
यह भी पढ़ें 👉  उत्तराखंड पुलिस के दो अधिकारियों को मिला सम्मान, डॉ. जगदीश चंद्र को राष्ट्रपति पुलिस पदक और हरबन्स सिंह को गोल्ड मेडल
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

You cannot copy content of this page