दिखावे की चकाचौंध में महिलाओं की भागीदारी को नजर अंदाज कर रही है डबल इंजन सरकार: खष्टी बिष्ट

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महिला कांग्रेस स्थापना दिवस के अवसर पर आज भवाली में महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष खष्टी बिष्ट के नेतृत्व में महिलाओं को बधाई देते हुए मिष्ठान वितरण किया।
और कहा कि आजादी के 75 वर्षों के बाद भी महिलाओं को राजनीति में अपनी भागीदारी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है जबकि समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी गांधी जी जैसे अनेक सेनानियों ने महिलाओं की राजनीति में भागीदारी की वकालत की थी। भारत कोकिला सरोजिनी नायडू ने भी महिलाओं की राजनीति में भागीदारी के संदर्भ में तत्कालीन समाज को चेताया था। दरअसल, महिला आरक्षण बिल सन् 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा लोकसभा में पारित कराया गया था जिसमें लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में राजनीति में महिलाओं के भविष्य की दूरगामी योजना का प्रारूप रखा गया था। परंतु राजनीतिक उठा पटक ने इसे ठंडे बस्ती में डाल दिया है। ग्लोबल जेंडर गैप 2021 के अनुसार राजनीतिक सशक्तीकरण सूचकांक में भारत के महिला राजनीतिक प्रतिभागिता में भारी गिरावट आई है। जहां यह विधेयक 33 प्रतिशत आरक्षण की मांग करता है, वही 2019 में महिला मंत्रियों की संख्या मात्र 23 प्रतिशत थी जो घटकर 2021 में 9.1 प्रतिशत रह गई। सरकारों के आर्थिक- सर्वेक्षण में राजनीति में महिलाओं की भागीदारी निरंतर कम होती दिखाई दे रही है। अखंड भारत का स्वप्न देखने वाली डबल इंजन सरकार मुंह से तेजाब उगलती अपनी महिला प्रतिनिधियों को ही संपूर्ण देश की महिलाओं की प्रतिनिधि मानने का भ्रम पाल चुकी है। दरअसल, यह विधेयक समानता और समानता के अवसर प्रदान करने का बिल है। यह बिल महिला-पुरुष समानता, महिला सक्षमता विकास और महिलाओं के आत्म प्रतिनिधित्व तथा निर्णय लेने के लिए उनकी आत्मनिर्भरता को प्रेरित करता है। परंतु बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आत्म मुग्धता की चकाचौंध सर्कस में डबल इंजन सरकार देश की आधी आबादी को पीछे धकेल रही है।

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