मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरंग, डबल लेन मानसखंड के लिए बजट का आग्रह किया

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देहरादून-मसूरी रेल प्रोजेक्ट को मंजूर करने का आग्रह किया है। उत्तराखंड में प्रस्तावित 24 जल विद्युत परियोजनाओं की दोबारा समीक्षा की मांग करते हुए धामी ने कहा कि यह परियोजनाएं बर्षों से अलग अलग स्तर पर रुकी हुई हैं। मानस खंड मंदिर माला मिशन के लिए भी उन्होंने एक हजार करोड़ रुपये की सहायता मांगी। धामी मंगलवार को नई दिल्ली में मोदी से मिले और उन्हें तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देते हुए श्री महासू मंदिर की प्रतिकृति भेंट की।

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मुख्यमंत्री ने राज्य की विकास परियोजनाओं की पैरवी करते हुए प्रधानमंत्री से कहा कि जल विद्युत परियोजनाएं उत्तराखंड राज्य की जीडीपी में वृद्धि का मुख्य माध्यम हैं। अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य खुले बाजार से प्रतिवर्ष लगभग एक हजार करोड़ रूपये की बिजली खरीद रहा है। इससे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसलिए अलकनंदा, भगीरथी और अन्य सहायक नदियों पर प्रस्तावित 24 जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेषज्ञ समिति की अंतिम रिपोर्ट पर जल शक्ति मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय के साथ पुनर्समीक्षा की जाए। यह भी अनुरोध किया कि उत्तराखंड की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए सड़क निर्माण के दौरान क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए उपयुक्त भूमि के चयन में कठिनाई हो रही है, सड़क सहित अन्य अवस्थापना कार्यों के लिए वन कानूनों में राहत दी जाए।मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को बताया कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के अन्तर्गत चिन्हित 48 पौराणिक मंदिरों में से 16 मंदिरों में अवस्थापना विकास के कार्य शुरू हो चुके हैं। इन मंदिर मार्गों को डबल लेन करने के लिए एक हजार करोड़ की सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत कुमांऊ क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध पूर्णागिरी धाम को विकसित करने के लिये शारदा कॉरिडोर के विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। कैंची धाम का भी मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। पिथौरागढ़ स्थित सीमांत गांव गुंजी (आदि कैलाश क्षेत्र) को अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किए जाने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। राज्य सरकार द्वारा गुंजी तथा आदि कैलाश एवं ओम पर्वत के लिए हेली सेवाएं के लिए सर्वे किया 

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