प्रवेश परीक्षा से तीन दिन पहले बदला नियम, अभ्यर्थियों में नाराजगी
लिखित परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने मेरिट से प्रवेश पर जताई आपत्ति
हल्द्वानी। उत्तराखंड संयुक्त राज्य प्रवेश परीक्षा की प्रवेश प्रक्रिया में आवेदन की अवधि समाप्त होने के बाद किए गए बदलाव को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस और नाराजगी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रारंभिक अधिसूचना में लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसी आधार पर उन्होंने आवेदन किया और परीक्षा की तैयारी शुरू की। अब परीक्षा में महज तीन दिन शेष रहने पर वेबसाइट पर जारी नए नोटिफिकेशन में लिखित परीक्षा के स्थान पर स्नातक अथवा कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर मेरिट से प्रवेश देने की व्यवस्था की गई है।
अभ्यर्थियों के अनुसार नए निर्णय के साथ दोबारा आवेदन प्रक्रिया भी शुरू की गई है। हालांकि पहले आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं बताई गई है। अभ्यर्थियों का कहना है कि नए सिरे से आवेदन शुरू होने से प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा में आवेदकों की संख्या बढ़ सकती है।
आवेदन के बाद बदली प्रक्रिया पर सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि कक्षा 12वीं में अच्छे अंक होना अपने आप में कोई समस्या नहीं है, लेकिन आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रवेश का आधार बदलना सवाल खड़े करता है। उनका तर्क है कि यदि शुरुआत से ही मेरिट के आधार पर प्रवेश की जानकारी स्पष्ट होती तो अभ्यर्थी उसी आधार पर आवेदन करने या नहीं करने का निर्णय लेते।
आवेदक आदित्य वर्धन सिंह बिष्ट ने इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग को शिकायत भेजकर प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। शिकायत में कहा गया है कि बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, जिन्होंने अपनी स्नातक शिक्षा कई वर्ष पहले पूरी की है और अब एलएलबी में प्रवेश लेना चाहते हैं। ऐसे अभ्यर्थियों के लिए लिखित परीक्षा अपनी योग्यता प्रदर्शित करने का एक अलग और समान अवसर प्रदान कर सकती थी।
₹2000 शुल्क को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग
शिकायत में प्रवेश परीक्षा के लिए जमा किए गए ₹2000 शुल्क का भी उल्लेख किया गया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों के लिए यह राशि महत्वपूर्ण है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव के बाद पूर्व में जमा शुल्क और पहले किए गए आवेदन को लेकर विभाग को स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए।
लिखित परीक्षा कराने की मांग
अभ्यर्थियों ने मूल अधिसूचना के अनुसार लिखित प्रवेश परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रशासनिक या अन्य कारण से परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं है तो प्रक्रिया में बदलाव के कारणों और उसके आधार की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। साथ ही पहले से आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी विशेष अभ्यर्थी या वर्ग के विरोध में नहीं है। वे प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता, पूर्व सूचना और समान अवसर सुनिश्चित किए जाने की मांग कर रहे हैं। अब उच्च शिक्षा विभाग की ओर से शिकायत पर क्या संज्ञान लिया जाता है और प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव को लेकर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाता है, इस पर अभ्यर्थियों की नजर है।
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