नैनीताल में कविता’ विषयक पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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भवाली। कुमाऊँ विश्वविद्यालय की महादेवी वर्मा सृजनपीठ और ‘हिन्दवी’ के संयुक्त तत्वावधान में यूजीसी- मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर, हरमिटेज भवन, नैनीताल के कान्फ्रेंस हाॅल में ‘कैम्पस कविता’ विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में बतौर विषय-विशेषज्ञ सम्मिलित वरिष्ठ कवयित्री अनुपम सिंह ने नवोदित रचनाकारों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा कवियों में जहाँ यथार्थबोध की सशक्त अभिव्यक्ति है, वहीं विषयों में नयापन है। जब हम अपने समय को सौंदर्य के साथ दर्ज करने की कोशिश करेंगे, तब वह कविता होगी। कविता एक विचार है, वह हमें गढ़ती है। भाषा और बिम्बों को बहुत ध्यान से कविता में बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने अपने कविता संग्रह ‘मैंने गढ़ा है अपना पुरूष’ संग्रह से कविताओं- शर्तों पर टिका है मेरा प्रेम, मुझे इस बच्चे को जन्म देना होगा, मेरे पाठक, तुम्हें ऐसा लगता है, निरूपायता आदि का पाठ किया।
प्रतिष्ठित भारत भूषण सम्मान से सम्मानित कवि हेमन्त कुकरेती ने कहा कि कविता में जहाँ विचार महत्वपूर्ण है, वहीं कविता अपना असर समग्रता में छोड़ती है। प्रेम मानवीय चेतना का प्राथमिक प्रस्थान बिंदु है, जिससे हर कवि को गुजरना पड़ता है। उन्होंने अपनी कविताओं क्यों बताया जाए कि कौन अच्छा लगता है, चितरंजन, आँख, जन्म न मृत्यु और सिलबट्टा का पाठ किया।
चर्चित कवि शिरीष कुमार मौर्य ने अपने कविता संग्रह ‘ऋतुरैंण’ से कविता का पाठ करते हुए कहा कि मैं किसी और घर किसी और देश में नहीं रहना चाहता, मैं अपने समय में रहना चाहता हूँ। संचालन महादेवी वर्मा सृजन पीठ के समन्वयक मोहन सिंह रावत ने किया।
कार्यशाला में गूगल पंजीकरण के माध्यम से चुने गए 12 शोधार्थी-विद्यार्थियों ने अपनी मौलिक कविताओं का पाठ किया। कविता पाठ प्रतियोगिता में पूजा गोस्वामी ने प्रथम, अंजलि नैलवाल ने द्वितीय और हिमांशु विश्वकर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजयी प्रतियोगियों को कार्यशाला के विषय-विशेषज्ञ वरिष्ठ कवियों ने पुरस्कृत किया। कार्यशाला ‘हिन्दवी’ के अविनाश मिश्र और अनुराधा शर्मा के संयोजन में आयोजित की गई। धन्यवाद अतिथि व्याख्याता मेधा नैलवाल ने व्यक्त किया।
कार्यशाला में हिंदी विभाग, डीएसबी परिसर की डाॅ. शुभा मटियानी, डाॅ. शशि पाण्डे, डाॅ. दीक्षा मेहरा, डाॅ. कंचन आर्या, डाॅ. मथुरा इमलाल सहित डाॅ. जगदीश पंत ‘कुमुद’, देवीलाल गोधारा, ललित मोहन, बहादुर सिंह कुँवर आदि उपस्थित रहे।

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