भवाली। पहाड़ में समय के साथ भाई बहन के अटूट बन्धन राखी को मनाने का तरीका थोड़ा बदल गया है। फिर भी इस पर्व को लेकर भाई बहन के उत्साह में कमी नहीं आई है। हिंदुस्तान में रह रहे लोगों के साथ ही विदेश में रहने वाले लोगों को भी इस पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता। अपनो की खुशहाली के लिए डाक से भी राखी विदेशों में भाई बहनों तक पहुँचाई जा रही है। राखी के उत्साह से ही ओतप्रोत शनिवार को भवाली पोस्ट ऑफिस से भवाली निगलाट की एक बहन ने लंदन में रह रहे अपने भाई पी एस क्लेयर को राखी भेजी। भवाली पोस्टमास्टर इन्द्र कुमार दास ने कहा कि समय बदलने के साथ सोशल मीडिया में लोग अपनों को देश विदेश में राखी की बधाई देते हैं। वहीं लोग डाक से अपनों को देश-विदेश में राखी भेज रहे हैं। बताया अब तक 2 लोगों ने विदेश में राखी भेजी है। साथ ही कई जगह से राखियां आने का शिलशिला जारी है। यहां आने वाली राखी जल्द उनके भाइयों तक पहुंचा दी जाएगी।
स्कंद पुराण, पद्मपुराण और
श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार कथा के अनुसार भगवान विष्णु ने अदिति के गर्भ से वामन अवतार लिया और ब्राह्मण के वेश में
असुरराज राजा बली के द्वार भिक्षा मांगने पहुंच गए। चूंकि राज बली महान दानवीर थे तो उन्होंने
वचन दे दिया कि आप जो भी मांगोगे मैं वह दूंगा। भगवान ने बलि से भिक्षा में तीन पग भूमि
की मांग ली। बली ने तत्काल हां कर दी, क्योंकि तीन पग ही भूमि तो देना थी। लेकिन तब भगवान वामन ने अपना विशालरूप प्रकट किया। और दो पग में सारा आकाश, पाताल और धरती
नाप लिया। फिर पूछा कि राजन अब बताइये, कि तीसरा पग कहां रखूं। तब विष्णुभक्त राजा
बली ने कहा, भगवान आप मेरे सिर पर रख लीजिए और फिर भगवान ने राजा बली को
रसातल का राजा बनाकर अजर-अमर होने का वरदान दे दिया। लेकिन बली ने इस वरदान के साथ ही अपनी भक्ति के बल पर भगवान से रात दिन अपने सामने रहने का वचन भी ले लिया।
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