शहर में भू-माफियाओं ने करोड़ों की सरकारी जमीन नजूल भूमि 50-50 रुपये के स्टांप पर बेच दी और जिम्मेदार अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। जमीन खरीदने वालों ने इस पर बड़े-बड़े भवन खड़े कर दिए हैं। वनभूलपुरा के मलिक का बगीचा क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम की टीम के सामने ऐसे कई मामले आए हैं। हालांकि प्रशासन और नगर निगम ने नजूल भूमि का अतिक्रमण ढहाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को भी एक टीम ने करीब 6 खाली प्लॉटों पर कब्जा लेते हुए खरीद-फरोख्त पर पाबंदी लगाने से संबंधित नोटिस बोर्ड लगाए।
आठ माह पूर्व वनभूलपुरा के मलिक का बगीचा में नजूल भूमि से एक अतिक्रमण हटाया गया था। इसके बावजूद वहां नजूल भूमि पर प्लॉटिंग करने का मामला सामने आया। ऐसे में बीते रविवार को राजस्व विभाग और नगर निगम के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण ध्वस्त कराया। जेसीबी और आधा दर्जन से अधिक मजदूरों की मदद से कई घंटों तक अतिक्रमण पर कार्रवाई की गई। इसके बाद टीम फिर से सोमवार को मौके पर पहुंची। यहां करीब एक एकड़ भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। एक व्यक्ति ने जमीन को खुद की बताते हुए काफी विरोध भी किया। हालांकि, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि नजूल भूमि को फ्री होल्ड कराए बगैर उसपर कोई निर्माण नहीं किया जा सकता है। पूरे दिनभर में एक स्थायी और तीन अस्थायी निर्माण ध्वस्त किए गए। इधर, मंगलवार को सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, नगर आयुक्त पंकज उपाध्याय, एसडीएम परितोष वर्मा, सहायक नगर आयुक्त गणेश भट्ट फिर मौके पर पहुंचे। यहां खाली नजूल भूमि पर खरीद-फरोख्त पर रोक संबंधी नोटिस बोर्ड लगाए। इनमें से एक प्लॉट में कच्चा निर्माण हटाया। साथ ही उसपर की जा रही प्लाटिंग को सील भी की। महिला समेत कई लोगों ने इसका विरोध किया। एक व्यक्ति तो नगर आयुक्त को 50 रुपये का स्टांप दिखाकर भूमि को खुद की बताने लगा। उसने बताया, कुछ समय पूर्व ही उसे एक
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