उत्तराखंड में स्कूल बस और वैन संचालक मनमाना किराया नहीं वसूल पाएंगे। राज्य परिवहन प्राधिकरण(एसटीए) की 24 मार्च की बैठक में किराया तय किया जाएगा।
राज्य में अभी तक शिक्षण संस्थानों में संचालित वाहनों के लिए किराया तय नहीं है। ऐसे में मनमाने तरीके से किराया वसूले जाने की शिकायतें लगातार आती रही हैं। पिछले साल किराया निर्धारण के लिए कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी ने किराया तय करने के लिए सभी पक्षों से सुझाव लिए थे। संयुक्त परिवहन आयुक्त राजीव मेहरा की अध्यक्षता में गठित समिति ने किराया निर्धारण को लेकर विस्तृत रिपोर्ट परिवहन मुख्यालय को भेज दी है। एसटीए सचिव सनत कुमार सिंह के मुताबिक बैठक में शिक्षण संस्थानों में संचालित वाहनों के किराए निर्धारण का प्रस्ताव रखा जाएगा।
Xपहाड़ और मैदान के लिए अलग श्रेणी: Xसूत्रों के अनुसार, किराया निर्धारण में भौगोलिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाएगा। समिति मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों के लिए किराए की दो अलग श्रेणियां बना सकती है। वर्तमान में राज्य में करीब 15 हजार स्कूल बस-वैन संचालित हैं, जहां अभी 1600 से 3500 रुपये तक किराया लिया जा रहा
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