राजकीय महाविद्यालय गणाई गंगोली की प्रोफेसर शीतल आर्या का शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित

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राजकीय महाविद्यालय गणाई गंगोली की प्रोफेसर शीतल आर्या का शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित
पिथौरागढ़।
पिथौरागढ़ जनपद स्थित राजकीय महाविद्यालय गणाई गंगोली में राजनीति विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर सुश्री शीतल आर्या की एक पुस्तक-अध्याय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रकाशित होने से क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। उनका शोध-अध्याय “बॉर्डर, टेरिटरी एंड जियोपॉलिटिक्स: अ केस स्टडी ऑफ़ कालापानी बॉर्डर इश्यू बिटवीन इंडिया एंड नेपाल एंड इट्स इमप्लीकेशंस” प्रतिष्ठित मनोहर पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘द हिमालयन व्हिस्परिंग्स’ में सम्मिलित किया गया है।
यह शोध कार्य भारत-नेपाल के बीच कालापानी सीमा विवाद के ऐतिहासिक, भौगोलिक एवं भू-राजनीतिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है, जिसे समकालीन सीमा अध्ययन और रणनीतिक विमर्श के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अतिरिक्त सुश्री शीतल आर्या का विचार-लेख “एंकरिंग ट्रस्ट, नेविगेटिंग चैलेंजेज़: इंडिया ऐट द हेल्म ऑफ़ आईओआरा” एक अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक संतुलन पर सारगर्भित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। वहीं दिसंबर 2025 में प्रकाशित उनकी टिप्पणी “25 ईयर्स ऑफ़ ट्रस्ट: पुतिन्स विज़िट मार्क्स अ माइलस्टोन” में भारत-रूस संबंधों के 25 वर्षों की यात्रा, विश्वास और रणनीतिक साझेदारी का विश्लेषण किया गया है।
सुश्री शीतल आर्या की यह उपलब्धि न केवल राजकीय महाविद्यालय गणाई गंगोली, बल्कि पूरे पिथौरागढ़ जनपद और उत्तराखंड राज्य के लिए गौरव का विषय है। उनका कार्य सीमावर्ती क्षेत्रों, भू-राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन को नई दिशा प्रदान करता है तथा यह संदेश देता है कि पर्वतीय अंचलों से भी उच्च स्तरीय अकादमिक योगदान संभव है।

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