::अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस::
भवाली। अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस के मौके पर जहां देशभर में अग्निशमन सेवाओं की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर चर्चा हो रही है, वहीं भवाली में हालात अब भी चिंताजनक बने हुए हैं। पर्यटन नगरी के रूप में तेजी से विकसित हो रहे इस क्षेत्र में आग से सुरक्षा की व्यवस्थाएं आज भी बेहद कमजोर हैं। भवाली बाजार की बात करें तो यहां करीब 80 फीसदी मकान आज भी पुराने ढांचे के हैं, जो आग लगने की स्थिति में बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं। पिछले साल बाजार में लगी भीषण आग ने कई दुकानों और मकान को पल भर में राख कर दिया था। इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया, लेकिन उसके बाद भी ठोस इंतजाम नहीं हो पाए। इसी तरह सेनिटोरियम पार्किंग में दिल्ली से आए पर्यटकों की कार आग की भेंट चढ़ गई थी, जबकि रेहड़ क्षेत्र में कुछ दिन पहले ही एक गोशाला जलकर राख हो गई। रामगढ़ रोड़ में मेडिकल स्टोर जलकर गया था। लगातार हो रही इन घटनाओं के बावजूद आग से निपटने की तैयारी नाकाफी बनी हुई है। भवाली की भौगोलिक स्थिति इसे और अधिक संवेदनशील बनाती है। यहां से कैंची धाम, घोड़ाखाल गोलू मंदिर और आसपास के कई प्रमुख स्कूल स्थित हैं, जहां हर दिन हजारों पर्यटक और स्थानीय लोग गुजरते हैं। इसके बावजूद पूरे क्षेत्र में अग्निशमन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि बाईपास पार्किंग बनने के बाद भी भवाली को आज तक अपना एक भी अग्निशमन वाहन नहीं मिल पाया है। आग लगने की स्थिति में नैनीताल और भीमताल हल्द्वानी से दमकल वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। अक्सर जब तक वाहन मौके पर पहुंचते हैं, तब तक सब कुछ राख में तब्दील हो चुका होता है।
हालांकि जल संस्थान ने घटनाओं के बाद दो से तीन फायर हाइड्रेंट लगाए हैं, लेकिन इतनी बड़ी आबादी और पर्यटक दबाव के सामने यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कैंची धाम से लेकर भवाली तक आग बुझाने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है।
अंतर्राष्ट्रीय अग्निशमन दिवस के अवसर पर यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर कब भवाली को अपनी सुरक्षा के लिए बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में कोई बड़ी घटना होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
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