भवाली। सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में उस समय गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण देखने को मिला, जब विद्यालय के प्रतिष्ठित पूर्व छात्र एवं वीर चक्र से सम्मानित सेवानिवृत्त कमोडोर अनिल कुमार सिन्हा ने परिसर का दौरा किया। उनके आगमन से विद्यालय परिवार में उत्साह, गर्व और आत्मीयता का माहौल छा गया। अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए कमोडोर सिन्हा ने कैडेटों को संबोधित किया। उन्होंने एक युवा कैडेट से भारतीय सशस्त्र बलों में वरिष्ठ अधिकारी बनने तक की अपनी प्रेरक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि सैनिक स्कूल में प्राप्त अनुशासन, नैतिक मूल्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ने उनके व्यक्तित्व निर्माण और सैन्य जीवन में सफलता की मजबूत नींव रखी। उन्होंने अपने संबोधन में कड़ी मेहनत, चरित्र निर्माण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सफलता निरंतर प्रयास, अटूट लगन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का परिणाम होती है। कैडेटों को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने विश्वासपूर्वक कहा, “जो लोग अथक परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण रखते हैं, उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। कमोडोर सिन्हा ने विद्यालय की गौरवशाली परंपराओं को बनाए रखने का आह्वान करते हुए ईमानदारी, दृढ़ता और उच्च नैतिक मूल्यों के पालन की सीख दी। उनके प्रेरक विचारों ने उपस्थित विद्यार्थियों में नया उत्साह और आत्मविश्वास भर दिया।
कार्यक्रम के अंत में प्रधानाचार्या ग्रुप कैप्टन मधु सेंगर ने कमोडोर सिन्हा को विद्यालय की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। डायमंड जुबली समारोह आयोजन सचिव विभव श्रीवास्तव एवं ओबीए महासचिव विनोद सिंह ने भी स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनका आभार व्यक्त किया।
कमोडोर अनिल कुमार सिन्हा की यह यात्रा सैनिक स्कूल समुदाय के लिए प्रेरणा और गौरव का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध हुई। विद्यालय प्रशासन एवं समस्त स्टाफ ने उनके व्यस्त कार्यक्रम के बीच समय निकालकर कैडेटों का मार्गदर्शन करने हेतु हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया।
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