सिरोड़ी में किसानों को दी प्राकृतिक खेती की सीख, रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव बताए

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भवाली। राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो क्षेत्रीय केंद्र की ओर से सिरोड़ी ग्रामसभा में भारत सरकार के उर्वरकों का संतुलित प्रयोग विषय पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम ग्राम प्रधान नीमा बिष्ट की अध्यक्षता में संपन्न हुआ, जिसमें ग्रामीणों और काश्तकारों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ममता आर्य,
ने कहा कि खेती में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और केमिकल के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता लगातार कम हो रही है। फल एवं सब्जियों की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। किसानों से अपील की गई कि वे दोबारा प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर लौटें, जिससे मिट्टी की सेहत के साथ पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य भी सुरक्षित रह सके। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को घर में उपलब्ध गाय के गोबर, गोमूत्र और पेड़ों की पत्तियों से जैविक खाद तैयार करने की विधि सिखाई गई। साथ ही बताया गया कि कम लागत में तैयार होने वाली यह खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में बेहद उपयोगी है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर सकती है।
कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारी डॉ. राहुल देव ने बताया कि सिरोड़ी और भवाली क्षेत्र के ग्रामीणों एवं काश्तकारों को लगातार प्रशिक्षण देकर संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अधिक से अधिक किसानों को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
इस दौरान ग्राम प्रधान नीमा बिष्ट, प्रभारी अधिकारी डॉ. राहुल देव, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ममता आर्य, तकनीकी अधिकारी दयाल सिंह, तकनीकी अधिकारी गोपाल सिंह तथा तकनीशियन गिरीश चन्द्र सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और किसान मौजूद रहे।

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