होटल-होमस्टे का पंजीकरण अब हर पांच साल में कराना होगा रिन्यू, 31 दिसंबर तक पुराने कारोबारियों को मौका
पंजीकरण शुल्क में तीन से चार गुना तक बढ़ोतरी, पर्यटन कारोबारियों ने जताई नाराजगी
नैनीताल। उत्तराखंड पर्यटन विकास विभाग ने होटल और होमस्टे के पंजीकरण को लेकर नई नियमावली लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब होटल और होमस्टे संचालकों को प्रत्येक पांच साल में अपना पंजीकरण रिन्यू कराना अनिवार्य होगा। वहीं, पुराने पंजीकृत होटल और होमस्टे संचालकों को नए पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है, जिससे पर्यटन कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की चिंता बढ़ गई है।
होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने बताया कि पहले होटल और होमस्टे का पंजीकरण एक बार कराने पर ही मान्य रहता था और इसके लिए करीब 10 हजार रुपये शुल्क देना पड़ता था। लेकिन नई नियमावली के तहत अब हर पांच साल में पंजीकरण का नवीनीकरण कराना होगा। साथ ही श्रेणी, कमरों की संख्या और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर पंजीकरण शुल्क 30 से 40 हजार रुपये तक निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि पहले की तुलना में शुल्क में काफी बढ़ोतरी की गई है, जिसे कम किया जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि विभाग ने शहरी क्षेत्रों में होमस्टे पॉलिसी को समाप्त कर उसकी जगह बेड एंड ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) योजना लागू की है। होमस्टे योजना के तहत संचालक का उसी परिसर में रहना अनिवार्य था, जबकि बीएंडबी योजना में कोई भी व्यक्ति किराये पर भवन लेकर भी इसका संचालन कर सकता है।
होटल एसोसिएशन के महासचिव वेद साह ने कहा कि शहरी क्षेत्रों से होमस्टे योजना हटाने और हर पांच साल में भारी शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था से पर्यटन कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी। इससे छोटे होटल और होमस्टे संचालकों पर विशेष रूप से आर्थिक दबाव पड़ेगा।
31 दिसंबर तक कराना होगा पंजीकरण
जिला पर्यटन विकास अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्या ने बताया कि नए पंजीकरण के लिए पोर्टल खुला हुआ है। पुराने होटल और होमस्टे संचालकों को पांच जून से 180 दिनों का समय दिया गया है, जिसकी अंतिम तिथि 31 दिसंबर निर्धारित की गई है। इस अवधि में सभी पुराने संचालकों को नए पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा।
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