भवाली। जिला महिला कांग्रेस की अध्यक्ष एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री खष्टी बिष्ट ने आम बजट 2026 को बेहद निराशाजनक बताते हुए इसे “काल्पनिक सोच पर आधारित बजट” करार दिया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार तीसरी बार ऐसा बजट लेकर आई हैं, जिसने आमजन को भ्रमित करने के अलावा कुछ नहीं किया।
खष्टी बिष्ट ने कहा कि पिछले बजट की असफलताओं से कोई सीख नहीं ली गई। युवाओं, महिलाओं और किसानों के नाम पर सिर्फ योजनाओं की घोषणा की गई है, जो धरातल से कोसों दूर हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में अस्पतालों और इलाज में राहत की उम्मीद थी, लेकिन इस बार भी कुछ दवाइयों पर छूट देकर इतिश्री कर ली गई। उन्होंने आयुर्वेदिक एम्स की तर्ज पर अस्पताल विकसित करने की घोषणा को भी निजीकरण की ओर इशारा बताया।
उन्होंने कहा कि “विकसित भारत” के सपने में गांव, किसान, बेरोजगारी, युवा, महिला सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों को सीमित कर दिया गया है। शिक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है और पहाड़ी राज्यों को भी इस बजट से निराशा ही हाथ लगी है। विदेशी निवेश और निवेश आकर्षित करने की बातें भी हकीकत से दूर हैं।
महंगाई पर कोई ठोस चर्चा न होने, रसोई गैस सिलेंडर और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नियंत्रण को लेकर चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे में आम आदमी की थाली का बजट कैसे संभलेगा, यह समझ से परे है। इनकम टैक्स में भी कोई राहत नहीं दी गई।
खष्टी बिष्ट ने आरोप लगाया कि बजट में जेल और जुर्माने जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर डराने की कोशिश की गई है, जबकि महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य पर कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस का मतलब सीधे तौर पर बड़े औद्योगिक घरानों को फायदा पहुंचाना है। अर्थव्यवस्था के विकास के नाम पर पेश किए गए आंकड़े सिर्फ भ्रम फैलाने वाले हैं।
उन्होंने कहा कि “बजट जनता का होना चाहिए, न कि लुभावनी योजनाओं का।” वित्त मंत्री ने आमजन को तीसरी बार छलते हुए निराशाजनक बजट की हैट्रिक लगाई है।
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