राज्यपाल ने नैनीताल में पर्यटन विकास और वनाग्नि रोकथाम पर दिया जोर
नैनीताल। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने मंगलवार को लोक भवन में मुख्य विकास अधिकारी नैनीताल अरविंद कुमार पांडेय से शिष्टाचार भेंट कर जनपद में संचालित विकास कार्यों, पर्यटन गतिविधियों और नवाचारों की जानकारी ली।
मुख्य विकास अधिकारी ने राज्यपाल को बताया कि नैनीताल की पहचान यहां की झीलों से है, जिनके सौंदर्यीकरण और स्वच्छता को लेकर विशेष कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए होटल व्यवसायियों के साथ समन्वय स्थापित कर मार्केट लिंकेज की व्यवस्था की गई है। साथ ही युवाओं को स्वरोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि जनपद में होम स्टे को बढ़ावा देने के साथ-साथ मानकों के विपरीत संचालित होम स्टे के खिलाफ कार्रवाई भी की जा रही है।
राज्यपाल ने निर्देश दिए कि नैनीताल में नए पर्यटन स्थलों का विकास किया जाए और पर्यटकों को अधिक समय तक आकर्षित रखने के लिए विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सके।
इस दौरान राज्यपाल ने डीएफओ नैनीताल आकाश गंगवार से वन विभाग की गतिविधियों और वनाग्नि रोकथाम के उपायों की जानकारी भी ली। डीएफओ ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष जनपद की प्रमुख चुनौतियों में शामिल है, जिससे बचाव के लिए प्रभावित क्षेत्रों में सोलर फेंसिंग सहित अन्य सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि वनाग्नि नियंत्रण के लिए पीरूल संग्रहण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत स्थानीय लोगों को पीरूल एकत्र करने पर 10 रुपये प्रति किलोग्राम की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। साथ ही जनपद में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्यपाल ने पीरूल प्रबंधन के माध्यम से वनाग्नि रोकथाम के प्रयासों की सराहना करते हुए जनजागरूकता बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्रों में स्थानीय सहभागिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी बताई।
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