गरमपानी- बेतालघाट ब्लॉक के रातीघाट में शराब की दुकान खुलने के विरोध ने अब उग्र आंदोलन का रूप ले लिया है। दूसरे दिन भी क्षेत्रीय महिलाएं और महिला समूह सड़कों पर डटे रहे और दुकान के सामने जमकर नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। महिलाओं ने दो टूक कहा कि किसी भी हालत में शराब की दुकान को चलने नहीं दिया जाएगा। उनका आरोप है कि लगातार विरोध के बावजूद सरकार और प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश पनप रहा है।
आंदोलनकारी महिलाओं ने साफ किया कि यह सिर्फ शराब की दुकान का विरोध नहीं, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक अस्तित्व, सांस्कृतिक अस्मिता और आने वाली पीढ़ी को बचाने की निर्णायक लड़ाई है। उनका कहना है कि दुकान खुलने से जहां महिला सुरक्षा पर सीधा खतरा बढ़ेगा, वहीं युवाओं को नशे की ओर धकेला जाएगा और पारिवारिक व सामाजिक ताना-बाना कमजोर पड़ेगा।
सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि यह शराब की दुकान प्रसिद्ध कैंची धाम से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर खोली गई है। महिलाओं ने इसे धार्मिक आस्थाओं पर सीधी चोट बताते हुए कहा कि यह फैसला जनभावनाओं का खुला अपमान है।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी चेताया कि आसपास पांच विद्यालय संचालित हैं। ऐसे में शराब की दुकान का संचालन बच्चों और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जहां शिक्षा और संस्कार पनपने चाहिए, वहां नशे का माहौल तैयार किया जा रहा है। इस नाराजगी के साथ महिलाओं ने शिक्षा और संस्कारों पर पड़ने वाले खतरे को प्रमुख मुद्दा बनाया। महिलाओं ने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर पहलुओं को भी उठाया। उनका कहना है कि शराब की आसान उपलब्धता से नशे की लत बढ़ेगी, जिससे मानसिक और शारीरिक बीमारियों में इजाफा होगा। इससे घरेलू हिंसा, आर्थिक तंगी और परिवारों के टूटने जैसी समस्याएं भी बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पहले से ही स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, ऐसे में शराब को बढ़ावा देना लोगों को बीमारियों की ओर धकेलने जैसा है।
साथ ही महिलाओं ने यह मुद्दा भी उठाया कि क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों और चिकित्सकों की कमी है, लेकिन इसके बावजूद सरकार शराब की दुकान खोलने को प्राथमिकता दे रही है, जो पूरी तरह जनविरोधी फैसला है। महिलाओं ने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द ही दुकान को बंद नहीं किया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने खुली चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर हाईवे जाम किया जाएगा और आगामी विधानसभा चुनाव का पूर्ण बहिष्कार कर सरकार को सीधा जवाब दिया जाएगा।
आंदोलन के दौरान महिलाओं ने यह मांग भी जोरशोर से उठाई कि क्षेत्र में शराब की दुकान खोलने के बजाय विद्यालयों में रिक्त शिक्षकों की तैनाती की जाए, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए और युवाओं को बेहतर भविष्य देने की दिशा में काम किया जाए।
वही महिलाओं का कहना है कि यह आंदोलन अब एक दुकान के विरोध से आगे बढ़कर क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को बचाने की व्यापक लड़ाई बन चुका है। जिसे हर हाल में अन्त तक लड़ा जाएगा।
इस दौरान नव दुर्गा स्वयं सहायता समूह अध्यक्ष ललिता जोशी, हेमा देवी, सुनीता देवी, ग्राम प्रधान जया किशन, ग्राम प्रधान चंद्रा देवी, पार्वती देवी, रेखा भट्ट इत्यादि लोग मौजूद रहे।
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