दिल्ली उच्च न्यायालय ने पांचवीं कक्षा के एक छात्र को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने निजी स्कूल के खिलाफ दाखिल याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। साथ ही स्कूल को निर्देश दिया है कि वह बच्चे को छठी कक्षा में बैठने की अनुमति दे। छात्र ने निजी स्कूल की ओर से उसे पांचवीं कक्षा में फेल घोषित कर छठी कक्षा में प्रमोट करने से इनकार करने को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति सी हरी शंकर की पीठ ने इस मामले में पिता के मार्फत याचिका दायर करने वाले छात्र को तत्काल अंतरिम राहत दी है। पीठ ने कहा कि यह मामला तमाम तरह के कानूनी दांव-पेंच से भरा है। छात्र अपने अधिकारों की बात कर रहा है तो स्कूल की तरफ से नियमों का हवाला दिया जा रहा है। दोनों पक्ष शिक्षा के अधिकार अधिनियम की विभिन्न धाराओं का हवाला दे रहे हैं। सबसे पहला मुद्दा यह है कि बच्चे की शिक्षा किसी भी तरह प्रभावित न हो। इसलिए निजी स्कूल को बच्चे को छठी कक्षा में बैठने की अनुमति देने का आदेश दिया जा रहा है। पीठ ने कहा कि यह मामला शिक्षा से जुड़ा है।
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