भवाली। उत्तराखंड भारतीय गरीब मजदूर कामगार दल के संस्थापक, अध्यक्ष गिरीश चंद्र आर्या ने जिलाधिकारी के माध्यम से विधानसभा अध्यक्ष उत्तराखण्ड को पत्र भेजकर प्रदेश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा है कि वर्तमान समय में चुनाव लड़ना और लड़वाना अमीर व पूंजीपति घरानों तक सीमित होकर रह गया है, जबकि गरीब और मजदूर वर्ग का व्यक्ति सिर्फ मतदाता बनकर रह गया है।
अपने पत्र में गिरीश चंद्र आर्या ने कहा कि आज की चुनावी व्यवस्था में बिना धनबल के ग्राम प्रधान से लेकर विधानसभा और लोकसभा तक का चुनाव लड़ना गरीब व्यक्ति के लिए लगभग असंभव हो गया है। धनबल के सहारे कई लोग बिना योग्यता के भी विधानसभा और लोकसभा तक पहुंच रहे हैं, जो लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में देश ने 77वां गणतंत्र दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया, लेकिन गणतंत्र की उपलब्धियां अब सिर्फ पूंजीवाद और अमीर घरानों तक सिमटती जा रही हैं। गरीब व्यक्ति की भूमिका केवल वोट डालने तक सीमित हो गई है, जिससे भारत में स्वस्थ लोकतंत्र की परिकल्पना पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
गिरीश चंद्र आर्या ने इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताते हुए विधानसभा अध्यक्ष से जनहित और लोकतंत्र हित में मांग की है कि उत्तराखण्ड विधानसभा के आगामी सत्र में इस विषय पर गंभीर चर्चा और बहस कराई जाए। उन्होंने विशेष रूप से यह प्रश्न उठाया कि उत्तराखण्ड राज्य में सबसे गरीब व्यक्ति लोकसभा और विधानसभा का चुनाव कैसे लड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस नीति और व्यवस्था नहीं बनाई गई तो लोकतंत्र कमजोर होगा और आम जनता का विश्वास व्यवस्था से उठता चला जाएगा।
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