मुक्तेश्वर के होटल रेस्टोरेंट में एलपीजी किल्लत से लकड़ी कोयले में बन रहा खाना, मेन्यू किया शार्ट

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  • पर्यटन सीजन से पहले ही घरेलू व कमर्शियल गैस की किल्लत

प्रदीप कुमार

धारी ।

पर्यटन क्षेत्र मुक्तेश्वर में एलपीजी किल्लत से लकड़ी व कोयले में शिफ्ट हुए होटल।

रसोई गैस की किल्लत का असर पहाड़ी क्षेत्र में व्यापक रुप से दिखाई दे रहा है।

नैनीताल के सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल मुक्तेश्वर में एलपीजी किल्लत से लकड़ी व कोयले में अधिकतर होटल शिफ्ट हो गये है।

मुक्तेश्वर होटल एसोसिएशन अध्यक्ष सुदर्शन शाही ने बताया कमर्शियल गैस सिलंडर की कमी है लगभग एक माह से अधिक समय से मुक्तेश्वर में कमर्शियल गैस सिलंडर नही मिले है होटलों एवं रैस्ट्रोरेंट में खाने का मेन्यू शार्ट कर दिया गया है। कोयले व लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाया जा रहा है।
गैस्टों को पूर्व सूचना दी जा रही है कि मेन्यू शार्ट है।

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मुक्तेश्वर के होटल मेनेजर सूरज कुमार राठौर ने बताया गैस की कमी के कारण होटल व्यवसायियों ने पारंपरिक तरीकों से खाना बनाने के लिए मजबूर है।
खाने के मेन्यू में कमी कर दी गई है। कोयले व लकड़ी के चूल्हे में खाना बनाया जा रहा है।
कोयला हल्द्वानी से लाया जा रहा है स्थानीय मार्केट में कोयला 60 से 80 रु किलो तक मिल रहा है।

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दीपक सिंह बिष्ट, होम स्टे व्यवसायी मुक्तेश्वर – सरगाखेत, ने बताया गैस की कमी से होम स्टे प्रभावित हुए है। मुक्तेश्वर सरगाखेत में पहले ही पानी कमी रहती है यहाँ पेयजल योजना से पर्याप्त पानी घरों व होटलों को नही मिलता, अब दोहरी समस्या गैस की कमी के कारण उत्पन्न हो गई है।
विकेन्ड पर पर्यटन में भारी गिरावट है। गैस व पानी कमी से रुम चार्ज महंगा हो गया है। प्रशासन इस समस्या का समाधान नही कर पा रहा है।
आगे अप्रैल माह स्थिति खराब हो सकती है।

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वहीं गांवों में गैस को छोड़ लोगों ने लकडी पर खाना बनाने के लिए लोग मजबूर है चूल्हे में खाना बनाया जा रहा है।
वहीं इंडक्शन कुकटाप, हीटर, पुराने लोहे के परम्परागत चूहे लोगों ने निकाल लिए है।
जहां पहले गैस सिलेंडर की गाड़ी पहुंचती थीं, वहां अब कोयले से लदी गाड़ी पहुंच रही हैं।
इतना ही नहीं, छोटे रेस्टोरेंट व्यवसायियों कहना है गैस की कमी से रोजगार प्रभावित हो रहा है।
होटलों ने आउडडोर वैकल्पिक किचन बनाये हैं जिसमें खाना पकाने में अधिक समय लग रहा है।

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