आईवीआरआई मुक्तेश्वर में “एडवांस्ड डिजीज डायग्नोसिस व नेक्स्ट जेनरेशन वैक्सीन प्लेटफॉर्म्स” पर 10 दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
धारी। भाकृअनुप–भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) मुक्तेश्वर में “पशुधन में एडवांस्ड डिजीज डायग्नोसिस एंड नेक्स्ट जेनरेशन वैक्सीन प्लेटफॉर्म्स” विषय पर भाकृअनुप प्रायोजित दस दिवसीय लघु प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का शुभारंभ संस्थान के सभागार में किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 9 से 18 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
पशुधन में उभरती और पुनः उभरती बीमारियों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को उन्नत रोग निदान तकनीकों तथा नेक्स्ट जेनरेशन वैक्सीन प्लेटफॉर्म्स के बारे में अद्यतन जानकारी प्रदान करना है। साथ ही प्रतिभागियों को आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों से परिचित कराने और व्यावहारिक अनुभव देने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं अध्यक्ष संयुक्त निदेशक डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने कहा कि पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन को मजबूत बनाने में उन्नत रोग निदान तकनीकों और आधुनिक वैक्सीन प्लेटफॉर्म्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को नवीनतम वैज्ञानिक प्रगति से अवगत कराने के साथ-साथ उनके व्यावहारिक कौशल को भी मजबूत बनाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को विशेषज्ञों के व्याख्यानों के साथ हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण का अवसर भी मिलेगा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम सह-निदेशक के रूप में डॉ. आशुतोष फुलार (वैज्ञानिक), डॉ. अमित कुमार (वरिष्ठ वैज्ञानिक), डॉ. विशाल चंदर (वरिष्ठ वैज्ञानिक) और डॉ. अमीर कुमार सामल (वैज्ञानिक) कार्य कर रहे हैं। इस अवसर पर डॉ. आशुतोष फुलार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्देश्यों और रूपरेखा की जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान कोर्स कम्पेंडियम का भी विमोचन किया गया। प्रशिक्षण में देश के विभिन्न संस्थानों से आए 15 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के सहायक प्राध्यापक तथा रिमाउंट वेटरिनरी कॉर्प्स (आरवीसी) के सेना अधिकारी भी शामिल हैं। प्रशिक्षण के दौरान जूनोटिक रोगों के महत्व तथा मानव और पशु स्वास्थ्य के संदर्भ में उनकी भूमिका पर भी विशेष चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम का समापन डॉ. आशुतोष फुलार द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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