ज्योलीकोट में पीलिया-डायरिया का कहर, दो मौतों से दहशत
दूषित पेयजल से 8-10 गांवों में बिगड़े हालात, सुरक्षा के मद्देनजर स्कूल-अंगनबाड़ी केंद्र अग्रिम आदेश तक बंद
ज्योलीकोट। भीमताल ब्लॉक के ज्योलीकोट और आसपास के करीब 8 से 10 गांवों में पीलिया (जॉन्डिस), डायरिया और टायफाइड के प्रकोप से हड़कंप मचा हुआ है। दूषित पेयजल आपूर्ति को संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। हालात लगातार गंभीर होने के चलते क्षेत्र में जनस्वास्थ्य संकट जैसे हालात बन गए हैं। संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र के सरकारी और निजी विद्यालयों के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों को अग्रिम आदेशों तक बंद रखने के निर्देश जारी किए हैं।
बताया जा रहा है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग जलजनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। कई लोग उपचार के लिए अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों का रुख कर रहे हैं। बीमारी के बढ़ते मामलों से ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। वहीं, दूषित पानी की समस्या को लेकर लोगों में आक्रोश भी बढ़ रहा है।
दो मौतों से बढ़ी चिंता
जलजनित संक्रमण की स्थिति अब गंभीर रूप ले चुकी है। क्षेत्र में बीमारी के चलते दो लोगों की मौत होने की सूचना है। दो मौतों के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते दूषित पानी की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद
बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी भीमताल की ओर से अग्रिम आदेशों तक क्षेत्र के प्रमुख सरकारी एवं निजी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक आदेश के अनुसार निम्न संस्थान बंद रहेंगे—
- राजकीय इंटर कॉलेज, ज्योलीकोट
- राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ज्योली
- राजकीय प्राथमिक विद्यालय, ज्योलीकोट
- राजकीय प्राथमिक विद्यालय, गांजा
- राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, छीड़ागांजा
- हिमालयन एकेडमी, ज्योलीकोट
- सेंट एंथोनी कॉन्वेंट, ज्योलीकोट
- सेंट एंथोनी कॉलेज, ज्योलीकोट
- बाल संसार स्कूल, ज्योलीकोट
- नेचर वैली इंटरनेशनल स्कूल, सरियाताल
इसके अलावा ज्योली, ज्योलीकोट, सरियाताल, भल्यूटी और बेलुवाखान के आंगनबाड़ी केंद्र भी अग्रिम आदेश तक बंद रहेंगे।
ब्लॉक प्रमुख के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने उठाया कदम
क्षेत्र पंचायत भीमताल के ब्लॉक प्रमुख डॉ. हरीश सिंह बिष्ट के कड़े निर्देश और हस्तक्षेप के बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद करने की प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में तत्काल स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भेजकर घर-घर स्वास्थ्य जांच कराई जाए। साथ ही पेयजल स्रोतों और पानी के सैंपल की जांच कर दूषित पानी की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
ग्रामीणों में आक्रोश
बीमारी फैलने और दो मौतों के बाद ग्रामीणों में प्रशासन और संबंधित विभागों के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। लोगों ने प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य शिविर लगाने की मांग की है।
वर्तमान हालात को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के सामने संक्रमण की रोकथाम सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। अब लोगों की निगाहें प्रशासन की ओर हैं कि जलजनित बीमारी पर जल्द से जल्द किस तरह काबू पाया जाता है।
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