ज्योलीकोट के बाद रामगढ़ में दूषित पानी का खतरा, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग

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  • जल स्रोतों और लाइनों की तत्काल सफाई कराने की मांग, स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को उबालकर पानी पीने की दी सलाह

भवाली। ज्योलीकोट में दूषित पानी से लोगों के बीमार पड़ने का मामला सामने आने के बाद अब रामगढ़ क्षेत्र में भी पेयजल की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। मल्ला रामगढ़ के ग्रामीणों ने बरसात के दौरान पेयजल स्रोतों में मिट्टी और गंदगी मिलने की आशंका जताते हुए जल संस्थान के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने समय रहते पानी की जांच और जल स्रोतों की सफाई कराने की मांग की है, ताकि पीलिया और डायरिया जैसी जलजनित बीमारियों के खतरे को टाला जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में जल स्रोतों में अशुद्धियां मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच जरूरी है। उन्होंने जल संस्थान से मल्ला रामगढ़ क्षेत्र के जल स्रोतों और पेयजल लाइनों की तत्काल जांच व सफाई कराने के साथ पानी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की। जांच में किसी तरह की अशुद्धि या संक्रमण मिलने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
ग्रामीणों ने कहा कि ज्योलीकोट में दूषित पानी से लोगों के बीमार होने की घटना के बाद प्रशासन और संबंधित विभाग को रामगढ़ में भी एहतियाती कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि बीमारी फैलने का इंतजार करने के बजाय पहले ही पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। वहीं प्रभारी चिकित्सा अधिकारी प्रदीप पांडे ने बताया कि रामगढ़ क्षेत्र से अभी तक दूषित पानी के कारण बीमारी के ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं। उन्होंने बरसात को देखते हुए लोगों से पानी उबालकर पीने, जागरूक रहने और किसी भी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल अस्पताल पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लेने की अपील की है। ज्ञापन देने वालों में समाजसेवी नवाब हुसैन, पंचायत प्रतिनिधि सनी, पूर्व प्रधान रेखा जोशी, अजय पांडे, कन्नू लाल और राम लाल समेत ग्रामीण शामिल रहे।

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