जंगलियागांव इंटर कॉलेज में विज्ञान वर्ग नहीं होने से ग्रामीणों में रोष

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जंगलियागांव इंटर कॉलेज में विज्ञान वर्ग नहीं होने से ग्रामीणों में रोष
15 से 20 किमी दूर जाने को मजबूर छात्र-छात्राएं, सांसद अजय भट्ट को भेजा ज्ञापन
भीमताल। ग्राम पंचायत जंगलियागांव, हरिनगर और मलुवाताल क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को राजकीय इंटर कॉलेज जंगलियागांव में विज्ञान वर्ग की पढ़ाई की सुविधा नहीं मिलने से अभिभावकों और ग्रामीणों में जबरदस्त रोष है। विज्ञान वर्ग नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को या तो विज्ञान की पढ़ाई से वंचित होना पड़ रहा है या फिर 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित विद्यालयों का रुख करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार राजकीय इंटर कॉलेज जंगलियागांव में वर्ष 2017 से कला वर्ग की कक्षाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन अब तक विज्ञान वर्ग शुरू नहीं किया गया है। विज्ञान वर्ग खोलने को लेकर शासन स्तर पर प्रस्ताव भी लंबित बताया जा रहा है। हाल ही में राज्य सरकार की ओर से प्रदेश के कई विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया, लेकिन इसमें जंगलियागांव इंटर कॉलेज का नाम शामिल नहीं होने से ग्रामीणों और विद्यार्थियों में नाराजगी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या से मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा को भी भीमताल आगमन के दौरान कई बार अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर ग्राम प्रधान राधा कुल्याल ने एक बार फिर सांसद एवं पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट को ज्ञापन भेजकर विद्यालय में विज्ञान वर्ग खोलने की मांग की है। बताया गया कि सांसद अजय भट्ट की ओर से भी मुख्यमंत्री को विज्ञान वर्ग शुरू करने के संबंध में पत्र भेजा गया है।
ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में विद्यार्थी इंटरमीडिएट स्तर पर विज्ञान वर्ग की पढ़ाई करना चाहते हैं, लेकिन सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक और भौगोलिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द शासन स्तर पर लंबित प्रस्ताव को मंजूरी देकर जंगलियागांव इंटर कॉलेज में विज्ञान वर्ग की कक्षाएं शुरू करने की मांग की है।
इस दौरान शिक्षक अभिभावक संघ अध्यक्ष गोपाल दत्त पलड़िया, ग्राम प्रधान संगठन अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गंगोला, हरिनगर प्रधान जानकी आर्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य गीता आर्य, गोपाल सिंह पड़ियार, वीरेंद्र सिंह कुल्याल, प्रेम सिंह कुल्याल, महेंद्र सिंह पड़ियार, हेमा पड़ियार समेत कई अभिभावक और ग्रामीण मौजूद रहे।

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