ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल में पंचायती राज अधिकारियों के लिए एआई कार्यशाला शुरू

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प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और एआई टूल्स के व्यावहारिक उपयोग पर दो दिवसीय प्रशिक्षण

भीमताल, 10 सितंबर। ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी, भीमताल परिसर में उत्तराखंड सरकार के पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के लिए ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, एआई टूल्स एंड एप्लीकेशंस’ विषय पर दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में 40 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इसका उद्देश्य अधिकारियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग और एआई आधारित टूल्स के व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण देकर दैनिक प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी एवं तकनीक आधारित बनाना है।

कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा सैद्धांतिक जानकारी के साथ हैंड्स-ऑन अभ्यास भी कराया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को सरकारी एवं प्रशासनिक कार्यों में एआई टूल्स के प्रभावी उपयोग का व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है।

भीमताल परिसर के निदेशक ने शासन एवं प्रशासन में एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ChatGPT और Microsoft Copilot जैसे टूल्स तेजी से पेशेवर कार्यप्रणाली का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि एआई साक्षरता वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण कार्यस्थलीय कौशल बन चुकी है।

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उन्होंने कहा कि जनरेटिव एआई का प्रभावी उपयोग केवल एआई टूल्स को संचालित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए सही प्रश्न पूछना, सटीक प्रॉम्प्ट तैयार करना और आवश्यक संदर्भ उपलब्ध कराना भी जरूरी है। उन्होंने प्रतिभागियों को विभिन्न एआई टूल्स का प्रयोग करने और अपने नियमित प्रशासनिक कार्यों में इनके व्यावहारिक उपयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित किया, जिससे कार्यकुशलता, उत्पादकता और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सके।

इस अवसर पर उन्होंने ग्राफिक एरा के संस्थापक प्रो. (डॉ.) कमल घनशाला के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय की स्थापना केवल क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नहीं की, बल्कि सरकारी तंत्र को मजबूत करने के लिए अधिकारियों एवं कर्मचारियों हेतु इस प्रकार की क्षमता निर्माण कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को भी प्रोत्साहित किया है। उन्होंने प्रतिभागियों से विश्वविद्यालय की सुविधाओं एवं सीखने के वातावरण का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।

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कार्यशाला के आयोजन एवं समन्वय में डॉ. श्याम एस. कपरी, एसोसिएट प्रोफेसर एवं असिस्टेंट डीन (ट्रेनिंग एंड प्रोजेक्ट्स) के प्रयासों की सराहना की गई। कार्यशाला के सुचारू संचालन में प्रो. संदीप बुधानी, विभागाध्यक्ष, डीसीए, तथा श्री गोविंद जेठी, को-कन्वीनर्स, का भी निरंतर सहयोग एवं समन्वय रहा।

तकनीकी सत्रों की शुरुआत भीमताल परिसर के निदेशक द्वारा रिसोर्स पर्सन के रूप में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जनरेटिव एआई और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग पर सत्र से हुई। इसमें सरकारी एवं प्रशासनिक कार्यों में एआई के व्यावहारिक उपयोग और प्रभावी प्रॉम्प्ट तैयार करने की मूलभूत तकनीकों पर जानकारी दी गई।

इसके बाद डॉ. हिमांशु पंत ने ‘प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग टेक्नीक्स फॉर एडमिनिस्ट्रेटिव एप्लीकेशंस’ विषय पर सत्र लिया। उन्होंने इंस्ट्रक्शन-बेस्ड, कॉन्टेक्स्चुअल, रोल-बेस्ड, मल्टी-स्टेप और स्ट्रक्चर्ड प्रॉम्प्ट के साथ प्रॉम्प्ट ऑप्टिमाइजेशन तकनीकों एवं सामान्य त्रुटियों की जानकारी दी।

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प्रो. (डॉ.) भूपेश रावत ने ‘एआई-असिस्टेड ऑफिशियल ड्राफ्टिंग विद ChatGPT’ विषय पर हैंड्स-ऑन सत्र कराया। इसमें प्रतिभागियों ने आधिकारिक पत्र, सर्कुलर, नोटिस, बैठक सारांश, परियोजना प्रस्ताव, निरीक्षण रिपोर्ट, कार्यालय आदेश और नीति संबंधी नोट तैयार करने में ChatGPT के उपयोग का अभ्यास किया।

वहीं प्रो. (डॉ.) अंकुर सिंह बिष्ट ने ‘लेवरेजिंग Google Gemini फॉर एआई-इनेबल्ड गवर्नेंस’ विषय पर सत्र लिया। इसमें दस्तावेज तैयार करने, रिपोर्ट का सारांश, बैठक ब्रीफ, डेटा की व्याख्या, अनुवाद, बहुभाषी संचार और Google Workspace के साथ एआई के उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही एआई टूल्स की सीमाओं एवं इनके उपयोग में आवश्यक सावधानियों पर भी चर्चा की गई।

कार्यशाला के पहले दिन प्रतिभागियों को एआई एवं प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की आधारभूत जानकारी के साथ इनके प्रशासनिक कार्यों में व्यावहारिक उपयोग का प्रशिक्षण मिला।

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