पंचायतों में महिलाएं नाम भर की प्रधान नहीं रहेंगी,परिवार और पतियों की छाया से बाहर निकल कर स्वयं पद के अनुरूप निर्णय लेंगी

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पंचायतों में महिलाएं अब नाम भर की प्रधान या सदस्य नहीं रहेंगी। परिवार और पतियों की छाया से बाहर निकल कर वे स्वयं अपने पद के अनुरूप निर्णय लेंगी। त्रिस्तरीय पंचायतों में महिला जनप्रतिनिधियों को प्रभावशाली बनाने के लिए चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू हो गया है।

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सोमवार को देहरादून में राज्य स्तरीय प्रशिक्षकों के शिविर में महिला जनप्रतिनिधियों को कई बारीकियां सिखाई गईं। पंचायती राज निदेशक निधि यादव ने कहा कि पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ‘प्रधान पति’ जैसी परंपराओं को समाप्त कर निर्वाचित महिलाओं के नेतृत्व कौशल को मजबूत करना जरूरी है। उपनिदेशक मनेाज कुमार तिवारी ने बताया कि शिविर में 44 सहायक विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी, पूर्व एवं वर्तमान पंचायत प्रतिनिधि शामिल हैं। इसका उद्देश्य 19 हजार महिला पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायती राज्य व्यवस्था की सभी जानकारियां देना है।

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