किसान मेले में नई तकनीकों ने बढ़ाई काश्तकारों की उम्मीदें

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  • मेले में प्रगतिशील किसानो को सम्मानित किया गया

भवाली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) मुक्तेश्वर में मंगलवार को आयोजित किसान मेला, गोष्ठी एवं प्रदर्शनी काश्तकारों के लिए ज्ञान और नवाचार का बड़ा मंच बनकर उभरा। पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जलवायु अनुकूल पशुपालन विषय पर केंद्रित इस मेले में दूरदराज के गांवों से पहुंचे लगभग एक हजार किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मेले में धारी, गहना, दाडिमा, शशबनी, मझेड़ा, ल्वेशाल, तल्ली दीनी, गढ़गांव, सूपी, झुतिया, कोकिला बना जैसे गांवों से पहुंचे काश्तकारों ने न केवल नई तकनीकों को जाना, बल्कि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद कर अपनी समस्याओं के समाधान भी तलाशे।
संयुक्त निदेशक डॉ. यशपाल सिंह मलिक ने अपने संबोधन में बदलती जलवायु के बीच पशुपालन को टिकाऊ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि देश में वर्तमान में करोड़ों की संख्या में पशुधन और पोल्ट्री मौजूद है, जबकि 2050 तक बढ़ती आबादी के साथ पोषण की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक नवाचार बेहद जरूरी हैं, जिन पर देशभर के 120 से अधिक संस्थानों के वैज्ञानिक कार्य कर रहे हैं। मुख्य अतिथि लक्ष्मीकांत (विवेकानंद पर्वतीय कृषि संस्थान, अल्मोड़ा) एवं विशिष्ट अतिथि जगदीश सिंह त्यागी (निदेशक, केन्द्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर) सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी किसानों को आधुनिक तकनीकों, बेहतर नस्लों और आय बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी। मेले की खास बात रही पशु प्रदर्शनी, जिसमें एचएफ और बद्री गाय आकर्षण का केंद्र बनीं। इसके अलावा मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन और बकरी पालन की इकाइयों ने काश्तकारों को वैकल्पिक आय के नए रास्ते दिखाए।
विभिन्न स्टॉलों में आईवीआरआई मुक्तेश्वर, आईवीआरआई बरेली, पशुपालन विभाग, यूसीबी पंतनगर, जैविक उत्पाद, महिला समूहों और आरोही संस्था ने अपनी-अपनी योजनाएं और उत्पाद प्रदर्शित किए। साथ ही मानव स्वास्थ्य शिविर भी लगाया गया, जिससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य लाभ मिला।
कार्यक्रम के दौरान प्रगतिशील किसानों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, जिससे अन्य काश्तकारों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष ने किया, जबकि समन्वयक डॉ. अमोल गुरव रहे। मेले में बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसानो को सम्मानित किया गया। ग्रामीणों ने आयोजन को ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक बताया।

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