अतीत और विस्थापन की संवेदनाओं से भरी हैं जोनाकी रे की कविताएँ

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भवाली। विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर के 165वें जन्मदिन के अवसर पर कुमाऊँ विश्वविद्यालय की रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजन पीठ में शुक्रवार को डीएसबी परिसर के अंग्रेजी विभाग में अंग्रेजी कवयित्री, लेखिका और संपादक जोनाकी रे का एकल कविता-पाठ एवं विद्यार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जोनाकी रे ने अपने चर्चित कविता संग्रह फायरफ्लाई मेमोरीज से ‘बिलांगिंग’, ‘द सीक्रेट टू ए गुड बिरयानी’, ‘इटिंग वाटर एंड लिविंग टेल्स’, ‘ए रूम ऑफ हर ओन’, ‘बर्न’ तथा ‘फायरफ्लाई’ जैसी कविताओं का पाठ किया। उनकी कविताओं में बिछड़ने की पीड़ा, स्मृतियों का बोझ और अपने अतीत को वर्तमान से जोड़ने की गहरी संवेदना दिखाई दी।
उन्होंने बताया कि संग्रह का पहला खंड प्रवासी जीवन के अनुभवों पर आधारित है, जिसमें अपनी मिट्टी छोड़कर नई जगह बसने की बेचैनी और संघर्ष को बेहद मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है। वहीं दूसरे खंड में उन मजदूर प्रवासियों की कहानियाँ हैं, जो मजबूरी में अपना घर छोड़ते हैं और विदेशी धरती पर पहचान और अधिकारों के बिना श्रम करते हैं।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर तथा इलिनोइस यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त जोनाकी रे ने कहा कि संग्रह का तीसरा भाग राजनीतिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़ा है, जिसमें जाति और सांप्रदायिक हिंसा, ऑनर किलिंग, महिलाओं के खिलाफ हिंसा और तेजाब हमलों जैसे समकालीन मुद्दों को उठाया गया है।
संग्रह का चौथा भाग “घर” की बदलती अवधारणा पर केंद्रित है, जिसमें उम्र बढ़ने, माता-पिता के बदलते जीवन, प्रियजनों के खोने और स्त्री अनुभवों को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
महादेवी वर्मा सृजन पीठ के निदेशक शिरीष कुमार मौर्य ने कहा कि ‘फायरफ्लाई मेमोरीज’ अतीत की पड़ताल करने वाला ऐसा संग्रह है, जो स्मृतियों, संवेदनाओं और सांस्कृतिक अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से सामने लाता है। उन्होंने कहा कि जोनाकी रे कविता के पारंपरिक ढांचे को तोड़ते हुए परिचित अनुभवों को नए अर्थ देती हैं।
कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापक हरिप्रिया पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महादेवी वर्मा सृजन पीठ के समन्वयक मोहन सिंह रावत ने दिया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने समकालीन लेखन, साहित्य की प्रासंगिकता और वर्तमान समय की चुनौतियों पर कवयित्री के साथ संवाद भी किया। कार्यक्रम में प्रो. चन्द्रकला रावत, प्रो. प्रीति आर्या, डॉ. शशि पाण्डे, डॉ. दीक्षा मेहरा, डॉ. कंचन आर्या, डॉ. मथुरा इमलाल, मेधा नैलवाल, शिवानी शर्मा, हिमांशु विश्वकर्मा, रोहित सिंह रौतेला सहित अनेक शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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