आईवीआरआई मुक्तेश्वर पहुंचे राज्यपाल, ‘खेत बचाओ अभियान’ का किया शुभारंभ

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आईवीआरआई मुक्तेश्वर पहुंचे राज्यपाल, ‘खेत बचाओ अभियान’ का किया शुभारंभ
वैज्ञानिक अनुसंधान का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए: राज्यपाल गुरमीत सिंह
मुक्तेश्वर/नैनीताल। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) मुक्तेश्वर का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग करते हुए ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया।
राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और अनुसंधान का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना होना चाहिए। वैज्ञानिक उपलब्धियों का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे। उन्होंने आईवीआरआई मुक्तेश्वर को विज्ञान, सेवा और राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए संस्थान के पशु स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा और पशुधन विकास के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। विशेष रूप से महिलाओं की आजीविका और आत्मनिर्भरता में पशुपालन की अहम भूमिका है। उन्होंने वैज्ञानिकों से ‘लैब टू लैंड’ की अवधारणा को और प्रभावी बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि शोध का लाभ दूरस्थ गांवों और सीमांत पशुपालकों तक पहुंचना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि डेयरी, बकरी पालन, कुक्कुट पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने आईवीआरआई से युवाओं को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में विशेष पहल करने को कहा।
जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को देखते हुए राज्यपाल ने ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि मानव, पशु और पर्यावरण का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है, इसलिए पशु स्वास्थ्य और जैव सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वित प्रयास जरूरी हैं।
उन्होंने उत्तराखंड की स्वदेशी पशु नस्लों, विशेषकर बद्री गाय के संरक्षण और संवर्धन पर जोर देते हुए प्राकृतिक खेती एवं पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के वैज्ञानिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), टेली-वेटरिनरी सेवाओं और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।
युवा वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसमें मानवीय संवेदनाएं जुड़ी हों। उन्होंने वैज्ञानिकों से गांवों में जाकर किसानों और पशुपालकों की समस्याओं को समझने तथा उनके व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने आईवीआरआई मुक्तेश्वर से उत्तराखंड में कम से कम 100 मॉडल पशुपालक गांव विकसित करने की दिशा में कार्य करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान अपनी वैज्ञानिक क्षमता के बल पर विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इससे पूर्व राज्यपाल ने संस्थान की विभिन्न प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्राकृतिक कोल्ड स्टोरेज कक्ष का निरीक्षण किया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा, संयुक्त निदेशक डॉ. एसके सिंह, डॉ. शेर सिंह सहित अधिकारी और कृषक मौजूद रहे।

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