ओखलकांडा देवगुरु पर्वत पर विराजमान है देवगुरु बृहस्पति की तपोस्थली, श्रद्धालुओं की हर मनोकामना होती है पूर्ण

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देवगुरु पर्वत पर विराजमान है देवगुरु बृहस्पति की तपोस्थली, श्रद्धालुओं की हर मनोकामना होती है पूर्ण

ओखलकांडा। कुमाऊं की सुरम्य पहाड़ियों के बीच स्थित ओखलकांडा क्षेत्र का देवगुरु पर्वत धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक ऊर्जा और रहस्यमयी मान्यताओं का प्रमुख केंद्र माना जाता है। समुद्र तल से लगभग आठ हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देवगुरु बृहस्पति मंदिर को देवताओं के गुरु बृहस्पति की तपोस्थली माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इसी पवित्र स्थल पर देवगुरु बृहस्पति ने कठोर तपस्या की थी, जिसके कारण इस पर्वत का नाम देवगुरु पर्वत पड़ा।
क्षेत्र के दर्जनों गांवों में देवगुरु बृहस्पति को आराध्य देव के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती और देवगुरु की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। स्थानीय लोककथाओं में मंदिर की महिमा और यहां प्राप्त हुए चमत्कारों का उल्लेख आज भी सुनने को मिलता है।
मान्यता है कि देवगुरु बृहस्पति की पूजा-अर्चना करने से कुंडली में बृहस्पति ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। विवाह में आने वाली बाधाएं, दाम्पत्य जीवन की परेशानियां तथा आर्थिक और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। राजनीति, शिक्षा और सामाजिक जीवन में सफलता एवं प्रतिष्ठा की कामना लेकर भी बड़ी संख्या में लोग देवगुरु के दरबार में माथा टेकते हैं।
श्रद्धालुओं का यह भी विश्वास है कि विश्व में देवगुरु बृहस्पति को समर्पित यह एकमात्र प्रमुख मंदिर है। हालांकि इसके ऐतिहासिक प्रमाण सीमित हैं, लेकिन आस्था के स्तर पर इसकी महत्ता अत्यंत विशेष मानी जाती है।
मंदिर तक पहुंचने के लिए काठगोदाम से धानाचूली, ओखलकांडा और करायत होते हुए देवली गांव पहुंचना पड़ता है। यहां से लगभग चार किलोमीटर की पैदल चढ़ाई के बाद घने जंगलों के बीच स्थित मंदिर परिसर तक पहुंचा जा सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र आध्यात्मिक साधना के लिए भी उपयुक्त माना जाता है।
विशाल मंदिर परिसर में देवगुरु बृहस्पति मंदिर के अलावा वाराही देवी मंदिर सहित कई अन्य धार्मिक स्थल स्थित हैं। परिसर के उत्तरी छोर पर स्थित वाराही देवी मंदिर से मौसम साफ होने पर कैलाश मानसरोवर क्षेत्र के दिव्य दर्शन होने की मान्यता है। इसके समीप हेड़ाखान मंदिर और छोटा कैलाश मंदिर भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। आसपास मौजूद प्राकृतिक गुफाएं, दुर्लभ जड़ी-बूटियां और मनमोहक वादियां इस स्थान की आध्यात्मिक एवं प्राकृतिक महत्ता को और बढ़ा देती हैं।
आस्था, प्रकृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम समेटे देवगुरु पर्वत आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक विशेष आकर्षण बना हुआ है, जहां पहुंचकर भक्त स्वयं को दिव्य ऊर्जा के निकट अनुभव करते हैं।

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