भवाली। भवाली सेनिटोरियम की वरिष्ठ विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. शशिबाला के बागेश्वर स्थानांतरण को लेकर कांग्रेस पीसीसी सदस्य एवं पूर्व दर्जा राज्य मंत्री खष्टी बिष्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे मरीजों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार के निर्णय को निराशाजनक और संवेदनहीन करार दिया है। खष्टी बिष्ट ने कहा कि वर्ष 1912 में स्थापित भवाली सेनिटोरियम कभी देश-दुनिया के नामी मरीजों और उत्तराखंड के टीबी रोगियों के उपचार के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन आज यह अस्पताल सरकार की उपेक्षा के कारण बदहाल स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी, जर्जर भवन, संसाधनों का अभाव तथा आवश्यक बजट की कमी के चलते इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में अस्पताल में करीब 55 टीबी मरीज भर्ती हैं। ऐसे समय में चेस्ट रोग, प्लूरल टैपिंग और ब्रोंकोस्कोपी जैसी गंभीर बीमारियों की विशेषज्ञ डॉ. शशिबाला का स्थानांतरण मरीजों के हितों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के अलावा बड़ी संख्या में ओपीडी के मरीज भी विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए यहां पहुंचते हैं। ऐसे में वरिष्ठ चिकित्सक का तबादला स्वास्थ्य विभाग का अव्यावहारिक निर्णय है। खष्टी बिष्ट ने आरोप लगाया कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के बजाय उन्हें कमजोर कर रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं सरकारी अस्पतालों को कमजोर कर उनके निजीकरण की दिशा में कदम तो नहीं उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भवाली से भी वरिष्ठ चिकित्सक का स्थानांतरण किया गया, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं और सीएचसी भवाली आज भी रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
उन्होंने सरकार से डॉ. शशिबाला का स्थानांतरण तत्काल निरस्त करने, भवाली सेनिटोरियम में विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, आवश्यक मशीनों, उपकरणों और दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की।
खष्टी बिष्ट ने चेतावनी दी कि भवाली सेनिटोरियम क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर है। यदि सरकार ने अपने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया तो इसके विरोध में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
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